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Monday, 22 September 2014

सर्पदंश के प्राथमिक उपचार में आशा की किरण

अब तक सर्पदंश की एकमात्र भरोसेमंद कारगर इलाज एंटीवेनम इंजेक्शन है जो सांपों के विष से ही तैयार होता है। विषरोधक एंटीवेनम वर्तमान में मरीजों में इंजेक्ट किया जाता है.प्रयोगशाला परीक्षण में एक आशाजनक परिणाम से पता चला है एंटीवेनम गोली को भी सीधे सर्प के काटने के बाद लिया जा सकता है। इंजेक्शन की सुविधा अक्सर कई मील दूर पर उपलब्ध हो पाती है और मरीज के वहां पहुंचने तक देर हो चुकी रहती है। अस्पताल तक पहुंचने से पहले सर्प के काटने से मरने वाले मरीजों में से तीन चौथाई की यही गति होती है।

इस समस्या से निजात पाने की पहल कलकत्ता विश्वविद्यालय की एक शोधकर्ता रोशनआरा मिश्रा ने अपने अनुसन्धान के जरिये किया है और एक सर्वसुलभ प्रतिविष गोली की ईजाद में सफलता पाई है। इसके तहत एंटीवेनम को चीनी से बने एक सस्ते और गैर विषैले गोंद जैसा पदार्थ अल्जीनेट में लेपित करके गोली का रूप दिया गया है जो प्राथमिक उपचार के रूप में तत्काल दिया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने इस चूहों से ली गई आंतों में इस गोली के प्रयोग से पाया कि इनका पाचन नहीं होता और इसतरह इन्हे पचाया नहीं जा सकता और यह सर्प विष को निष्क्रिय करने में प्रभावी रहा। यह शोध "PLOS Neglected Tropical Diseases" के सात अगस्त २०१४ के अंक में छपा है। 
 भारत में विषैले सर्पदंश की वार्षिक दर एक लाख से ऊपर है (स्रोत : विकिपीडिया ) 

संयुक्त राज्य अमेरिका, कैलिफोर्निया अकादमी में एक शोधकर्ता मैथ्यू लेविन कहते हैं कि : " अल्जीनेट के लेप में विषरोधक को खिलाने का एक अच्छा विचार है. लेविन सर्पदंश पीड़ितों के इलाज के लिए एक सस्ते antiparalytic नाक स्प्रे विकसित किया है. देखिये यह गोली पूर्ण रूप से निरापद होकर कब बाज़ार आती है।



Wednesday, 12 January 2011

सर्दी में सांप से सामना

सांप का नाम सुनते ही जहां लोगों के शरीर में एक सर्द सिहरन दौड़ जाती है वहीं अगर सर्दी में किसी सांप का सामना हो जाय तो सन्निपात का होना तय समझिये .ताज्जुब की बात यह है की मिर्जापुर शहर के महुवरिया मोहल्ले में पिछले आठ जनवरी की हाड कपाऊं ठण्ड में जबकि पारा पांच और तीन डिग्री सेल्शियस के बीच अठखेलियाँ कर रहा था सर्प महराज ने एक मेढक को पकड़ ही तो लिया -वे नाली के सहारे मकान में घुसने के फिराक में थे या शायद वहां पहले से ही मौजूद मेढक ने उन्हें ललचाया तो वे सर्दी में भी पेट पूजा को उद्यत हो गए .

धामन की  कुण्डली  में निरीह मेढक
      
 फिर तो वहां कोलाहल मचा ..मकान मालिकान लाठी बल्लम से लैस साँप पर भारी पड़े और कुछ ही पलों में शिकारी खुद शिकार हो गया ...आज भी किसी भी साँप चाहे वह कितना ही विषहीन और अहानिकर क्यूं न हो को देखते ही मार डालने की आदिम प्रवृत्ति बनी हुयी है ...हां मेढक राम बच गए और जाके राखे साईयाँ मार सके ना कोय की कहावत को एक बार फिर चरितार्थ कर गए .इस पूरे मामले में जो सबसे हैरत में डालने वाली बात है और जिसके कारण यह पोस्ट लिखनी पडी वह यह है की जाड़े में ये निम्न वर्गीय प्राणी शीत निष्क्रियता यानी हाईबर्नेशन में चले जाते हैं -यही कारण है मेढक छिपकली और सांप इन दिनों नहीं दीखते -इनमें वातावरण के तापक्रम के उतार चढाव के मुताबिक़ शरीर का तापक्रम बदलता रहता है -इसलिए शीत निष्क्रियता इनकी जीवन रक्षा का एक उपाय है -लेकिन इस समय भी सांप और मेढक की सक्रियता का  दिखना एक दुर्लभ दृष्टांत है जिसे यहाँ रिपोर्ट किया जा रहा है!

मेढक जिन भारतीय सापों के मीनू में सबसे ऊपर है वे हैं चेकर्ड कीलबैक पनिहा सांप -नैट्रिक्स पिस्कैटर जिसके शरीर पर शतरंज के खानों की तरह चित्र पैटर्न होते हैं और दूसरा है धामन सांप जिसे घोडापछाड़  के नाम से भी जानते हैं और जिसका वैज्ञानिक नाम है टायस  म्यूकोसिस है .ये दोनों ही नितांत निरापद और अहानिकर सांप है .पनिहा सांप जहां ज्यादा लंबा नहीं होता -यह औसतन केवल डेढ़ हाथ -साढे तीन से चार फीट लंबा होता है इसलिए इसका एक बोलचाल का नाम डेढ़हा है जबकि धामन ग्यारह फीट तक लम्बी हो सकती है .धामन को चूहे भी बहुत प्रिय हैं जबकि पनिहा सांप मेढक प्रेमी है ! 


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Wednesday, 8 October 2008

गाँव से यह स्कूप लेकर लौटा हूँ !

भरपेट भोजन के बाद चल पड़े डगमग


गाँव गया था,जौनपुर -मेरे तीन दिन के प्रवास में दो साँप दिखे -दोनों शुभ संयोग से विषहीन ! एक तो वोल्फ स्नेक था जिसके बारे में इस ब्लॉग पर पहले ही चर्चा हो चुकी है .दूसरा साँप पानी का साँप था जिसे चैकेर्ड कीलबैक वाटर स्नेक कहते हैं .इसका प्राणी शास्त्रीय नाम xenochropis piscator है .जब यह देखा गया तो यह एक बड़े से मेढक को निगल चुका था-इसके शरीर के फूले हिस्से को देखकर आप ख़ुद अंदाजा लगा सकते हैं .बहरहाल जैसा कि आम तौर पर गावों में होता है लोगबाग की भीड़ इसका काम तमाम करने को जुटने लगी और मेरे बच्चे इसकी तस्वीर उतारने में मशगूल हो गए -वीडियो भी लिया गया है ,देखिये लोड हो पता है या नहीं .नहीं तो फिलहाल फोटो से ही और कुछ अपनी कल्पना से वहाँ मचे हो हल्ले का अंदाजा लगाईये -बड़ी मुश्किल से मैं लोगों को इसे मार देने से रोक पाया -भीड़ भाड़ और हो हल्ला सुन कर इसने निगल चुके मेढक राम को उगल दिया -वे अधमरे से चित्र में देखे जा सकते हैं .बाद में Rana tigrina प्रजाति के ये महाशय जिन्हें गाँव में गोपाल मेढक भी कहते है चैतन्य हो गए और फूट निकले .बेटे कौस्तुभ और बेटी प्रियेषा साँप को पहले ही एक सुरक्षित स्थान पर ले जाने में सफल हो चुके थे ।
जाऊं तो जाऊं किधर जाऊँ ?

पानी के साँप को जौनपुर में पंडोल या देडहा भी कहते हैं अन्य अंचलों में इसका स्थानीय नाम दूसरा होगा .यह मछली और मेढक ख़ास तौर से पसंद करताहै -प्रायः तालाबों के निकट और धान के खेतों में दिखता है .ये दिन रात सक्रिय रहते हैं .ये वैसे तो गुस्सैल स्वभाव के होते हैं और छेड़े जाने पर किचकिचा के काट सकते है मगर 'सलीके '
से पेश आने पर पालतू भी हो सकते हैं .ये बिल्कुल ही विषहीन होते हैं -सौंप के खाल के व्यापारियों के साफ्ट टार्गेट हैं -तेजी से इनकी संख्या कम हो रही है -इनका पर्यावास भी खतरे में है -तालाब भी तेजीसे पट रहे हैं ।
इसके मुंह की पेशियाँ इतनी लचीली होती हैं कि ये काफी बड़े आकार के मेढक ,मछली और परिंदों को समूचा जिंदा निगल सकते हैं । जान बची तो लाखो पाये




इस पूरे प्रकरण का वीडियो मैं किसी न्यूज़ चैनेल को बेचने की फिराक में हूँ ताकि एक बाबा के झूठ मूठ संजीवनी के प्रलाप कीबजाय किसी सौ फीसदी सच्ची ख़बर को मीडिया में उछाला जा सके .है कोई बोली लगाने वाला ?
पुनश्च -आपको साँप को करीब से देखने के लिए फोटो को एनलार्ज कर देखना होगा !
और ये रहा वीडियो ! बड़ा मजेदार है जरूर देखिये !!

Monday, 4 August 2008

दुनिया का सबसे छोटा साँप खोजा गया !

दुनियाँ का सबसे छोटा साँप

नाग पंचमी की पूर्व संध्या पर सर्प प्रेमियों के लिए एक बड़ी ख़बर यह है कि दुनिया का सबसे छोटा साँप दिखा है -जो बारबाडोस के करेबियन आईलैंड से एक अमेरिकी सर्प विज्ञानी ने खोज निकाला है .यह महज १० सेंटीमीटर लंबा है .इसके खोजकर्ता एस ब्लेयर हेजेज है जो पेन्न स्टेट विश्वविद्यालय में वैकासिक जीव विज्ञान पढाते हैं ।


दुनिया मे अब तक ज्ञात ३१०० सर्प प्रजातियों में यह सबसे छोटा पाया गया है .ब्लेयर ने इस नए वामन साँप का नामकरण अपनी पत्नी कार्ला एन् हैस के नाम पर लेप्टो टायिफ्लोप्स कार्ली रखा है -उनकी पत्नी भी सर्प विज्ञानी हैं ।


राहत की बात तो यह है कि यह विषैला साँप नही है -दीमक ,कीट पतंगो ,भुनगों को खाता है -पूरी तरह निरापद जीव है .जहाँ से यह साँप मिला है वह द्वीप डार्विन के समय से ही भीमकाय और लघुकाय दोनों तरह के जानवरों के लिए विख्यात रहा है ।


कहते हैं तक्षक नाग ने एक फूलों की टोकरी में लघु रूप बनाकर राजा परीक्षित के महल में प्रवेश पा लिया था और उन्हें डस कर मौत की नीद सुला दिया .वह कोई ऐसा ही वामन रूप साँप रहा होगा ,मगर विषैला .क्यों ?

Sunday, 6 July 2008

"इस साँप का काटा सुबह की रोशनी नही देखता "

करैत जो नाग से भी ज्यादा विषैला है !

"इस साँप का काटा सुबह की रोशनी नही देखता " जैसी धारणा संभवतः करैत साप को लेकर ही है .यह एक सुस्त साँप है जो गाँव के कच्चे मकानों में े प्रायः घर के अन्दर बिलों में अपना डेरा जमाता है .

मैं समझता हूँ कि यही वह सांप है जिसके डसने से आदमी का बचना मुश्किल है ,हाँ समय से एंटीवेनम मिल जाय तो जान बच सकती है .यह रात को ही असावधान रहने पर या चारपाई पर पहले से ही मौजूद रहने पर सोते में काट सकता है .मुश्किल यह है कि इसके काटने पर कोई ज्यादा या कभी कभी तो बिल्कुल सूजन ही नही होती .और विषदंत भी कोबरा की तुलना में महीन होते हैं ,जिससे ये भी प्रमुखता से नही दिखते.अब यह पहचान मुश्किल हो जाती है कि किसी विषैले साँप ने काटा भी है या नही .

हाथ ,पैर का बेजान पडना एक लक्षण है जो थोडा विलंब से शुरू होता है लेकिन जल्दी ही गंभीर रूप ले लेता है .नतीजतन जिसे यह रात में काट ले और एंटीवेनम न मिले तो समझिये काम तमाम !

इसका मात्र ६ माईक्रोग्राम ही किसी की जान लेने में पर्याप्त है .

इस साँप से सबसे अधिक सावधान रहने की जरूरत है .ऊपर के चित्र में इसे पहचान लें यह काले रंग का नीली आभा लिए होता है और शरीर पर सफ़ेद धारियाँ दिखती हैं -कभी कभी वोल्फ स्नेक[संखारा या कौडिसाप] जो विषैला नही होता है को लोग भ्रम से करैत मान लेते हैं -दरअसल वोल्फ स्नेक भूरापन लिए होता है और पालतू बन जाता है .

एंटीवेनम को रखने के लिए किसी लाईसेंस की जरूरत नही है .बड़े मेडिकल स्टोरों पर यह मिल जायेगा .यह पाउडर फार्म में होता है और डिस्टिल्ड वाटर के साथ मिला कर घोल बना कर इंजेक्ट होता है .इसे यहाँ से भी प्राप्त किया जा सकता है -

Serum Institute of India

283 Mahtma Gandhi Road

Poona-४११००१

हिमाचल प्रदेश में भी सोलन जिले के कसौली नामक स्थान पर सर्पविष शोध और निर्माण संस्थान है .

मेरी कामना है कि किसी की भी सर्प दंश से मौत न हो ....आप भी कृपा कर सापों के बारे में लोगो में जागरूकता लायें .......

अब इस दहशत भरे माहौल से आपको बाहर लायें .....ईथोलोजी पर एक सौन्दर्यपरक श्रृखला की प्रतीक्षा करें -

नारी -नख शिख सौन्दर्य -नारी सौन्दर्य -व्यवहार विदों की नजर में ।

प्रतीक्षा करें ...........


Saturday, 5 July 2008

सर्पदंश: बचाव और उपचार


सर्पदंश: बचाव और उपचार

यदि आप गावों में रहते हैं तो टॉर्च या पर्याप्त रोशनी के साथ ही बाहर जाएँ ,बरसात में ख़ास तौर पर .पैरों को गम बूट ज्यादा सुरक्षा देते हैं मगर नही है तो ऐसा जूता रहे जो पैर को ऊपर तक अच्छी तरह ढक सके .साथ में एक डंडा और गमछा भी रखें .

यह सापों का प्रणय - प्रजनन काल भी है -ख़ास तौर पर नाग -कोबरा का .यह एक आक्रामक साँप है .यह अपनी टेरिटरी बना कर रहता है यानी एक ऐसा क्षेत्र जिसमें किसी को भी आने पर इसे नागवार लगता है .यदि प्रणय काल में कोई इस क्षेत्र से गुजरता है तो यह आक्रमण कर सकता है .इस पर पैर पड़ जाय तो यह काट ही लेगा .अगर किसी की अचानक नाग से भेट हो जाय तो वह अपना गमछा या कोई भी कपडा तुरत फुरत निकाली हुयी शर्ट या गंजी उस पर फेक दें.यह आदतन उससे उलझ लेगा और वह रफू चक्कर हो सकता है .कोबरा को लाठी से मारना ज़रा अभ्यास का काम है .लाठी तभी इस्तेमाल में लायें जब मरता क्या न करता की पोजीशन हो जाय .क्योंकि ऐसा देखा गया है कि निशाना यदि उसके मर्म स्थल [फन और इर्दगिर्द का हिस्सा ]पर नही पडा और आदतन लाठी मारने वाले ने लाठी उठायी तो वह उसके शरीर पर आ गिरेगा .और फिर वह क्रोध में काटेगा और विष भी ज्यादा निकालेगा .

विषैले सापों में दो विषदंत आगे ही ऊपर के जबड़े में होता है और २ विष की थैली इसी से दोनों और जुडी रहती हैं

खुदा न खास्ता साँप काट ही ले तो -

धैर्य रखें ,दौड़ कर न जाएँ -भागें न ,इससे विष रक्त परिवहन के साथ जल्दी ही पूरे शरीर में फैल जायेगा .रूमाल ,गमछा से जहाँ दंश का निशान है उसके ऊपर के एक हड्डी वाले भाग यानी पैर में काटा है तो जांघ में और हाथ में काटा है तो कुहनी के ऊपर बाँध दे ,बहुत कसा हुआ नही .पुकार कर किसी को बुलाएं या धीरे धीरे मदद के लिए आस पास पहुंचे .और तुंरत एंटीवेनम सूई के लिए पी एच सी पर या जिला अस्पताल पर पहुंचे .यह सूई अगर आसपास किसी बाजार हाट के मेडिकल स्टोर पर मिल जाय तो इंट्रामस्कुलर भी देकर अस्पताल तक पहुंचा जा सकता है -जहाँ आवश्यकता जैसी होगी चिकित्सक फिर इंट्रा वेनस दे सकता है . अगर आप के क्षेत्र में साँप काटने की घटनाएँ अक्सर होती है तो पी एच सी के चिकित्सक से तत्काल मिल कर एंटी वेनम की एडवांस व्यवस्था सुनिशचित करें - मेडिकल दूकानों पर भी इसे पहले से रखवाया जा सकता है . अगर शरीर में जहर ज्यादा उतर गया है तो एंटीवेनम के ५-१० वायल तक लग सकते हैं . एंटीवेनम १० हज़ार लोगों में एकाध को रिएक्शन करता है -कुशल चिकित्सक एंटीवेनम के साथ डेकाड्रान/कोरामिन की भी सूई साथ साथ देता है -बल्कि ऐसा अनिवार्य रूप से करना भी चाहिए .

कोबरा के काट लेने के लक्षण क्या हैं -काटा हुआ स्थान पन्द्रह मिनट में सूजने लगता है .यह कोबरा के काटे जाने का सबसे प्रमुख पहचान है .ध्यान से देखें तो दो मोटी सूई के धसने से बने निशान -विषदंत के निशान दिखेंगे .

प्राथमिक उपचार में नयी ब्लेड से धन के निशान का चीरा सूई के धसने वाले दोनों निशान पर लगा कर दबा दबा कर खून निकालें .और किसी के मुहँ में यदि छाला घाव आदि न हो तो वह खून चूस कर भी उगल सकता है .

विष का असर केवल खून में जाने पर ही होता है यदि किसी के मुंह में छाला पेट में अल्सर आदि न हो तो वह सर्पविष बिना नुकसान के पचा भी सकता है .

कोबरा का १२ माईक्रो ग्राम आदमी को मार सकता है मगर वह एक भरपूर दंश में ३२० माईक्रोग्राम विष तक मनुष्य के शरीर में उतार सकता है .मगर प्रायः लोग पावों को तेज झटक देते हैं तो पूरा विष शरीर में नही आ पाता .इसलिए कोबरा का काटा आदमी ५-६ घंटे तक अमूमन नही मरता .और यह समय पर्याप्त है एंटी वेनम तक पहुँच जाने के लिए।

करैत सुस्त साँप है मगर इसका ६ मिक्रोग्राम ही मौत की नीद सुला सकता है .यानी कोबरा के जहर की केवल आधी ही मात्रा .इसके बारे में कल ......

Thursday, 3 July 2008

सापों से बढ़ती मौतें और अनोनीमस जी की टिप्पडी !

साँपों के बारे में कल एनोनीमस जी की की एक बड़ी तल्ख़ टिप्पडी आयी .उन्होंने मुझे विग्यान के मठाधीश होने की उपाधि देते हुए यह उलाहना दिया है कि मैंने उक्त पोस्ट पर भारतीय ज्ञान की उपेक्षा की है .यहाँ मैं विनम्रता के साथ यह कहना चाहता हूँ कि जब सवाल आदमी की जान से जुडा हो तो हमें अकादमीय बहसों में नही पड़ना चाहिए - प्राच्य ज्ञान बेहतर है या पश्चिम का ज्ञान इसके चक्कर में बेचारा रोगी तो दम ही तोड़ देगा .जैसा कि हर साल ऐसे ही झमेले में पड़ कर लोग जान गवाते रहते हैं और एनोनीमस भाई लोग अप्रत्यक्ष तौर पर ही सही ऐसी मौतों के जिम्मेदार बनते हैं ।
मैं यहाँ विज्ञान का उपदेश देने नही आया .मनुष्य की सोशल ड्यूटी होती है वही निभा रहा हूँ .विभिन्न संचार माध्यमों के जरिये विगत तीस वर्षों से मैं लगातार यह कोशिश करता रहा हूँ कि सर्प दंश के रोगियों की संख्या कम हो सके .इसका श्रेय नही लेना चाहता पर समय से हस्तक्षेप के चलते मुझे अपने सामने कुछ लोगों को मौत के मुंह से वापस आ जाने का अनिवर्चनीय सुख साझा करने का अवसर मिला है -जो मेरे जीवन को सार्थकता प्रदान करता है .
मेरे टिटहरी सरीखे प्रयास से और आप लोगों तक यह बात पहुंचा कर ,इस गुजारिश के साथ कि इस बात को आप और लोगों में बाटें ताकि राजा परीक्षित के समय से छाया सर्प अज्ञानता का तमस धीरे धीरे दूर हो सके .
राजा परीक्षित को भी गुमान था कि उन्हें तक्षक नही डस सकेगा -सारी प्राच्य विद्याएँ उनकी जान नहीं बचा सकीं .इस आख्यान के यथार्थ /निहितार्थ को समझना चाहिए .

एनानिमस जी ,विज्ञान में मुल्ले -मठाधीशों के लिए कोई जगह नही होती और न ही यहाँ फतवों के जारी होने का कोई रिवाज ही है .मैं तो सापों के बारे में ये जानकारियाँ महज आप सभी से इसलिए बाँट रहा हूँ ताकि लोगों अकाल मौतों से बचाया जा सके .
अब कुछ काम की बात हो जाय .यह देखा गया है कि कई उन लोगों को जिन्हें धामन [रैट स्नेक ],पंडोल या देढ़हा [वाटर स्नेक ],या वोल्फ स्नेक आदि विषहीन सौंप काट लेते हैं उन पर झाड़ -फूँक का चमत्कारिक -मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है ।और इसका सेहरा ओझाओं सोखाओं के सर दिया बाँध जाता है .
ओझा सोखा तरह तरह के झाम फैलाते हैं -कान में जडी डालते हैं ,जिससे कान के परदे भी फट जाते हैं -नीम की पत्ती खिलायी जाती है जो घबराहट में मीठी लगती है .मनोन्माद में या दर्द से रोगी चिल्लाता है तो उसे साँप का लहर आना बताया जाता है .वह अनाप शनाप बोलता है तो बताया जाता है कि साँप स्वयं बोल रहा है ।इसे स्थानीय भाषा में 'अभुआना 'कहते हैं .आदि आदि .
अब चूंकि रोगी को तो विषैले सौंप ने तो काटा नही है वह इस तरह के आलतू फालतू उपचार के बाद ठीक भी हो जाता है -पी जे देवरस ने इन झाड़ फूंकों का विस्तृत व्योरा अपनी किताब 'द स्नेक आफ इंडिया ' में दिया है .नेशनल बुक ट्रस्ट आफ इंडिया से हिन्दी और अंगरेजी में प्रकाशित इस पुस्तक को पुराने और नयी पीढी को पढने की ,ख़ासकर जिनका संपर्क अभी गावों से बना हुआ है मैं जोरदार सिफारिश करता हूँ .यह साँपों का वेद है .
विषैले सौंप के मामले में झाड़ फूँक की सारी तदबीरें फेल हो जाती हैं और मरीज तिल तिल कर मौत की और बढ़ता रहता है .जिसका जिक्र कल .......

Wednesday, 2 July 2008

शुरू हो गया सर्पदंश से मौतों का सिलसिला ....

यह हैं सापों के लम्बरदार और सबसे अधिक मानव मौतों के जिम्मेदार नाग महराज
सापों से मरने का सिलसिला फिर शुरू हो चुका है .अब से अक्टूबर तक अमूमन हर रोज अखबारों की सुर्खियाँ आपको सापों से हो रही बेमौत मौतों का दास्तान बयान करती रहेंगी .यह एक वार्षिक त्रासदी है .भारत में हर वर्ष तकरीबन ३०००० लोग साँप काटने से मरते हैं ।मैंने इस भयावह त्रासदी को कोई तीसेक साल से जाना समझा है ।ये मौते रूक सकती हैं .ऐसा भी हो सकता कि एक भी मौत सौंप काटने से न हो .लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नही हो पा रहा है .कारण ?

सबसे बडा कारण भोले भाले ग्रामीणों के अंधविश्वास हैं .साँप काटने पर गावों में जो चिल्ल पों मचती है उसे आप सब ने देखा होगा .सबसे पहले लोग ओझा सोखा के पास लेकर रोगी को भागते हैं .अब साँप है तो उसको लेकर जितनी मुंह उतनी बातें -कोई बह्चरिया साँप का विष उसी साँप को बुलाकर खींच लेने का दावा करता है तो कोई जडी बूटी से काटे के इलाज का दंभ भरता है ।कोई मरीज को तुरत फुरत मस्जिद मजार वाले फकीर के पास ले जाने कि जिद करता है .नतीजा यह कि ज्यादातर मामलों में बिचारा मरीज बेमौत मारा जाता है .


सर्पदंश के शिकार व्यक्ति की बड़ी ही दुर्दांत मौत होती है -वह लकवाग्रस्त हो जाता है .जबान भी इसलिए बेकार हो जाती है ...बोल नही पाता ..संज्ञा बनी रहती है बस वेचारा असहाय लोगों को देखता निहारता अपनी बेबसी और लाचारी लिए संसार से विदा हो जाता है -सर्प दंश की मौत इसलिए ही दुसह दुःख देने वाले मानी जाती है .आप आश्चर्य करेंगे पूरे भारत में महज ४ ही साँप ऐसे हैं जिनके काटने से लोग मरते हैं -कोबरा ,करईत ,और वाईपर की दो प्रजातियाँ जो महाराष्ट्र और कुछ जगहों पर ही मिलती हैं -ज्यादातर तो यही कोबरा यानी नाग और करईत ही लोगों के मौत के जिम्मेदार हैं ।इनका विष नुरोटाक्सिक है यानी स्नायुतंत्र इनकी असर से काम करना बंद करता है ॥फेफडे काम करना बंद कर देते हैं .वाइपेर्स का विष खून को जमा देता है ,रक्त संचार रूक जाता है .


जहाँ का मैं रहने वालाहूँ -पूर्वांचल ,उत्तर प्रदेश -केवल नाग और करईत के गिरफ्त में है .यहाँ प्रतिवर्ष २ हजार लोग साँप काटने से मरते हैं .आख़िर सर्पदंश से बचने का और कारगर इलाज का मन्त्र क्या है ?बस केवल एंटी वेनोम और केवल एंटी वेनोम का इंजेक्सन ही सर्पदंश का शर्तिया इलाज है जो अब सरकार के आदेश से हर पी एच सी -प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर उपलब्ध है .यह पोलीवलेंट है यानी सभी चारों प्रकार के विषैले साँप को काटने पर लगाया जा सकता है -इसे इंट्रावेनस लगाते हैं -सीधे रक्त वाहिका में .अगर सर्पदंश के काटे को ६ घंटों के भीतर यह इंजेक्शन लगवा दिया जाय तो बच जायेगा -इसे गारंटी ही समझिये ।अक्सर यह छः घंटे झाड़ फूक में बीत जाते हैं और फिर कुछ नही किया जा सकता .

क्रमशः ......

Friday, 4 April 2008

शहर मे सांप !


शहर मे सांप !
अज्ञेय की एक कविता याद आती है -सांप तुम कभी सभ्य नही हुए और न होगे ,शहरों मे भी तुम्हे बसना नही आया ,एक बात पून्छू उत्तर दोगे ?कहाँ से सीखा डसना कहाँ से विष दंत पाया ?
यह कवि सत्य भले ही मनुष्य पर एक गहरा कटाक्ष है किंतु कवि का यह कहना कि 'सांप को शहर मे बसना नही आता सच नही निकला .एक सांप ने बनारस जैसे भीड़ भाड़ वाले शहर के आई पी माल सिगरा के सामने की कालोनी की पहली मंजिल के एक कमरे से निकल कर महान साहित्यकार के प्रेक्षण को झुठला दिया .
बनारस टाईम्स ऑफ़ इंडिया के छायाकार श्री राकेश सिंह जी ने मुझे अल्लसुबह फोन कर आज बताया कि उनके आई पी माल सिगरा के सामने की कालोनी की पहली मंजिल वाले फ्लैट से एक सांप निकला है जिसे उन्होंने संभाल कर शीशे के मर्तबान मे रख छोडा है .उन्होंने आग्रह किया कि मैं उसे पहचान कर कम से कम यह सुनिश्चित कर दूँ कि वह जहरीला है या नहीं .
मैं भागा भागा वहाँ पहुंचा ,साथ मे उत्सुकता वश मेरी बेटी प्रियषा भी अपना कैमरा और रोमुलस व्हिटकर तथा पी जे देवरस की साँपों पर पुस्तक लेकर साथ हो ली.
सांप पहचान लिया गया जो कामन वोल्फ स्नेक निकला -यह आदतन मानव साहचर्य मे और यहाँ तक कि शहरों मे भी मानव बस्तियों को रहने के लिए चुनता है -विषहीन है मगर सामने के दांत काफी बड़े होने के कारण ही इसे वोल्फ यानी भेडिया का संबोधन मिल गया है -क्योंकि भेडिया के दांत लंबे होते हैं .यह सांप उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल मे मिलता तो है लेकिन आश्चर्य है कि लोगों को इसके बारे मे मालूम नही है .इसे अक्सर करईत मानकर मार दिया जाता है क्योंकि करईत सबसे जहरीला सांप है .
आप भी इस सांप को ध्यान से देख लें क्योंकि अगली बार जब इसे देंखे तो कृपया इसे कदापि न मारे या न मारने दें क्योंकि यह बिल्कुल विषहीन और बड़ा प्यारा सा सांप है -यह आसानी से पालतू भी बन जाता है .राकेश जी ने इसे पालने का फैसला कर लिया है .
फोटो मेरी बेटी प्रियषा कौमुदी ने उतारी है .