Sunday, 6 July 2008

"इस साँप का काटा सुबह की रोशनी नही देखता "

करैत जो नाग से भी ज्यादा विषैला है !

"इस साँप का काटा सुबह की रोशनी नही देखता " जैसी धारणा संभवतः करैत साप को लेकर ही है .यह एक सुस्त साँप है जो गाँव के कच्चे मकानों में प्रायः घर के अन्दर बिलों में अपना डेरा जमाता है .

मैं समझता हूँ कि यही वह सांप है जिसके डसने से आदमी का बचना मुश्किल है ,हाँ समय से एंटीवेनम मिल जाय तो जान बच सकती है .यह रात को ही असावधान रहने पर या चारपाई पर पहले से ही मौजूद रहने पर सोते में काट सकता है .मुश्किल यह है कि इसके काटने पर कोई ज्यादा या कभी कभी तो बिल्कुल सूजन ही नही होती .और विषदंत भी कोबरा की तुलना में महीन होते हैं ,जिससे ये भी प्रमुखता से नही दिखते.अब यह पहचान मुश्किल हो जाती है कि किसी विषैले साँप ने काटा भी है या नही .

हाथ ,पैर का बेजान पडना एक लक्षण है जो थोडा विलंब से शुरू होता है लेकिन जल्दी ही गंभीर रूप ले लेता है .नतीजतन जिसे यह रात में काट ले और एंटीवेनम मिले तो समझिये काम तमाम !

इसका मात्र माईक्रोग्राम ही किसी की जान लेने में पर्याप्त है .

इस साँप से सबसे अधिक सावधान रहने की जरूरत है .ऊपर के चित्र में इसे पहचान लें यह काले रंग का नीली आभा लिए होता है और शरीर पर सफ़ेद धारियाँ दिखती हैं -कभी कभी वोल्फ स्नेक[संखारा या कौडिसाप] जो विषैला नही होता है को लोग भ्रम से करैत मान लेते हैं -दरअसल वोल्फ स्नेक भूरापन लिए होता है और पालतू बन जाता है .

एंटीवेनम को रखने के लिए किसी लाईसेंस की जरूरत नही है .बड़े मेडिकल स्टोरों पर यह मिल जायेगा .यह पाउडर फार्म में होता है और डिस्टिल्ड वाटर के साथ मिला कर घोल बना कर इंजेक्ट होता है .इसे यहाँ से भी प्राप्त किया जा सकता है -

Serum Institute of India

283 Mahtma Gandhi Road

Poona-४११००१

हिमाचल प्रदेश में भी सोलन जिले के कसौली नामक स्थान पर सर्पविष शोध और निर्माण संस्थान है .

मेरी कामना है कि किसी की भी सर्प दंश से मौत हो ....आप भी कृपा कर सापों के बारे में लोगो में जागरूकता लायें .......

अब इस दहशत भरे माहौल से आपको बाहर लायें .....ईथोलोजी पर एक सौन्दर्यपरक श्रृखला की प्रतीक्षा करें -

नारी -नख शिख सौन्दर्य -नारी सौन्दर्य -व्यवहार विदों की नजर में

प्रतीक्षा करें ...........


6 comments:

advocate rashmi saurana said...

achhi jankari dene ke liye aabhar.

Gyandutt Pandey said...

यह तो वही सज्जन हैं जो कोटा में हमारे स्नानघर में बैठे थे। गनीमत थी हमने अन्दर जाने से पहले बल्ब जला लिया था। एक ही पांव अन्दर बढ़ाया था। और चिकने फर्श पर करैत जी रेंग मुश्किल से पा रहे थे।
फिर जिस नाली से अन्दर आये थे, उसी से चले गये। अगले दिन नाली के मुहाने पर जाली लगवाई गयी।
एण्टीवेनम के प्रयोग से बच गये हम। या काट लेते तो कहीं दहशत में ही...

महेंद्र मिश्रा said...

badhiya jananakari dene ke liye abhaar .

Lovely kumari said...

badhiyan jankari.sanpo ke baare me maine bhi kuchh likha hai aapse anurodh hai dekhen jarur..aur tippni den

sanchika.blogspot.com

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

Serum Institute of India pataa dekar aapne achchha kiya, isse bahut logon ko faayda hoga.
Haan, ye srinkhla bhi bhi kaafi lokpriy rahi, badhayi.

pallavi trivedi said...

aaj pahli baar aapke blog par aana hua.sachmuh bahut hi upyogi jankari di hai aapne...main bhi ghar mein antivenam rakhungi.