Tuesday, 25 December 2012

नए वर्ष में आ धमकने वाला है एक धुंधकारी धूमकेतु!

हाँ ,खगोलविदों का तो अनुमान फिलहाल ऐसा ही है .अगली सर्दियों तक एक धुंधकारी धूमकेतु धरतीवासियों के लिए कौतूहल का विषय बनने  वाला है और कहते हैं कि अब तक के धूमकेतुओं में वह सबसे भव्य और चमकदार होगा . किन्तु कई खगोलविद यह भी कहते हैं कि कोई धूमकेतु कैसा दिखेगा यह शर्तिया तौर पर पहले से नहीं कहा जा सकता -क्योकि पिछले हेली और केहुतेक पुच्छल तारों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था .नए ढूंढें पुच्छल तारे के इशान (ISON) के बारे में भी कुछ ऐसे ही उहापोह हैं -किन्तु इसके खोजी शौकिया खगोलविदों आरटीओम नोविचोनोक (बेलरस ) और विटाली नेवेस्की(रूस) का  मानना है कि यह एक भव्य प्रदर्शनकारी धूमकेतु बनेगा! बोले तो पूरा धुंधकारी . इसे इसलिए ही अंतर्जाल पर ड्रीम कमेट कहा जा रहा है . यानी धूमकेतुओं के कितने ही सपनो को साकार कर जायेगा ईशान! 
क्या ग्रेट कमेट (1860) यानि ऊपर जैसा ही दिखेगा इसान? 

ईशान का नामकरण इंटरनेशनल सायिनटीफिक ओप्टिकल नेटवर्क का संक्षिप्त रूप है जिसके सदस्य इसके शौकिया खोजकर्ता हैं . यह तब देखा गया जबकि यह सूरज से लगभग 97 करोड़ किलोमीटर दूर था . दरअसल नेपच्यून के भी आगे इन धूमकेतुओं की एक मांद है जिसे ऊर्ट क्लाउड कहते हैं -वहीं से कभी कभार कोई गन्दा सा बर्फ का गोला (डरटी  आईस/स्नो  बाल ) सूरज के गुरुत्व क्षेत्र में आ टपकता है और फिर सूर्य की प्रदक्षिणा एक बहुत ही दीर्घ परिक्रमा पथ पर करने लगता है -ज्यों ज्यों वह सूर्य के निकट आता जाता है बर्फ के पिघलने से उसका प्रभा मंडल बनता(हालो )  बनता है और सौर हवाए पिघलते हिम धूल को सूर्य के विपरीत बहा ले चलती हैं जिनसे इनकी ख़ास पूंछ का निर्माण होता है -भारत में प्रायः इसे पुच्छल तारे के नाम से जानते हैं जबकि संस्कृत के ग्रंथों में इसे केतु कहा गया है ,यहाँ पुच्छल तारों को अशुभ माना जाता है . किन्तु ये संरचनाएं अन्य खगोलीय घटनाओं की तरह सामान्य घटनाएं ही हैं -हाँ खतरा तब हो सकता है जब कोई धूमकेतु पथभ्रष्ट होकर कहीं धरती के परिक्रमा पथ पर आकर धरती से भीड़ न जाय .

यदि अनुमान सच साबित हुए तो यह धूमकेतु आगामी दिसम्बर माह में दिन में भी चन्द्रमा जैसा दिख सकता है .मतलब यह परिमाप में काफी बड़ा लग रहा है . ऐसा भी समझा जा रहा है कि इसान बहुत कुछ 
''ग्रेट कमेट आफ 1680" सरीखा है और वैसा ही उसका भ्रमण  पथ है . अगले अगस्त माह तक इसान धरती से लगभग 32 करोड़ किमी तक आ पहुंचेगा और इसका आभा मंडल बनना शुरू हो जायेगा। और तभी सही अंदाजा भी हो जायेगा कि यह कैसा दिखेगा .  तब तक की आतुर प्रतीक्षा खगोल प्रेमियों को करनी होगी . 

19 comments:

दर्शन लाल बवेजा said...

सबसे भव्य और चमकदार होगा
वाह फिर तो
तैयारियां करते हैं इसके स्वागत की और इसकी मशहूरी की

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

स्वागत है धूमकेतु का। मैं ने कई धूमकेतु देखे हैं नंगी आँखों से। इसे भी देख लेंगे।

Virendra Kumar Sharma said...

महत्वपूर्ण अपडेट है भाई साहब ,इसे टाइम्स आफ इंडिया ने भी अपनी खबर बनाया है :

Rare supercomet to outshine Moon in '13

सौर मंडल के बाहरी इलाके से एक सुपर धूमकेतु (जटा धारी महाकाय सितारा )सूरज की तरफ बे -तहाशा दौड़ा आ रहा है .समझा जाता है नवम्बर 2013 में यह सूर्य के नजदीक तम होगा .तब

इसकी

चमक अपने चन्दा को मात देने लगेगी .

यह पहली मर्तबा सितम्बर 2012 में प्रेक्षण में लिया गया था .इसे खगोल विज्ञान के माहिरों ने नाम दिया है :

C/2012 S1 (ISON).

ISON का विस्तार है -INTERNATIONAL SCIENTIFIC OPTICAL NETWORK (अंतर -राष्ट्रीय वैग्यानिक संजाल ).

नैट वर्क परस्पर सम्बद्ध /जुड़े हुए कम्प्यूटरों का एक विशाल तंत्र होता है .यह रेडिओ दूरबीनों से प्राप्त ब्योरे का संसाधन करता है .


विज्ञान पत्रिका न्यू -साइंटिस्ट ने इस खबर को विस्तार से छापा है सुन्दर चित्रों के साथ .

इसे बेला रूस और रूस के शौकिया खगोल विदों ने ढूंढ निकाला है .

वास्तव में धूमकेतु सूरज के आवधिक मेहमान होते हैं .कुछ 200 साल से पहले ही सूरज से मिलने चले आते हैं इन्हें शार्ट पीरियड कोमेट कहा जाता है .शेष 200 साल के बाद ही मिलन मना पाते हैं

इन्हें लॉन्ग पीरीअड कोमेट कहा जाता है .

हेली का धूमकेतु शार्ट पीरीअड कोमेट है जो हरेक 75 बरस के बाद सूरज से मिलने आता है .

मंगल और बृहस्पति की कक्षा में धूमकेतुओं का एक बादल होता है .कभी कभार जब इनके दीर्घ वृत्ताकार पथ सूर्य की असरकारी गुरुत्व जद में आ जाते हैं .तब सूरज की विशाल गर्मी से यह

धुंधली बर्फीली चट्टानी गेंद पिघलने लगती है .

आरम्भ में धूमकेतु एक धुंधली बर्फीली गेंद सा ही होता है .

इस पिघलाव से बनता है इसका जटाजूट धारी सा सिर (Head of the comet ) .सिर के नीचे रहता है इसका केन्द्रीय भाग न्युक्लिअस . सौर विकिरण के दाब से जो इसे धरती की और ठेलता है

इसकी पूंछ का निर्माण होता है .खरबों बार पृथ्वी विशालकाय धूमकेतुओं की विरलीकृत विशाल काय पूंछ में से गुजर चुकी है इसका बाल भी बांका न हुआ है .

कोई अनर्थ अमंगल ,अनहोनी नहीं लाते हैं धूमकेतु .इनके पृथ्वी से टकरा जाने की संभावना भी अति क्षीण रहती है .और अब तो पृथ्वी से रोकिट दाग कर इनका परिक्रमा पथ भी ठेला जा सकता है

विचलित किया जा सकता है .

लम्बी तान के सोइये .

पृथ्वी पर जीवन के लिए ज़रूरी कच्चा माल सुदूर अतीत में धूमकेतुओं से ही आयातित हुआ था .कुछ खगोल विद ऐसा मानते आयें हैं जिनके अगुवा रहें है फ़्रेड होइल .

एक और अनुमान के अनुसार अब से कोई साढ़े छ :करोड़ बरस पहले एक विशालकाय धूमकेतु के पृथ्वी से आ टकराने से विशालकाय प्राणी धूमकेतुओं का सफाया हुआ माना जाता है .

सूरज की हरेक परिक्रमा में इन के द्रव्यमान का 10 % भाग गल खप जाता है .इनके टुकड़े ही हैं उल्काएं जिनकी चन्द्र सतह पर बरसात होती रहती है लेकिन पृथ्वी पर पहुँचने से पहले ये टुकड़े जल

खप जातें हैं .कभी कभार ही इनके अधजले अंश पृथ्वी पर पहुँच पाते हैं .

ध्रुवीय प्रदेशों में बरफ (हिमराशी )के नीचे सैंकड़ों धूमकेतु (छोटे बड़े )दबे पड़ें हैं .इनमे मौजूद हो सकता है जीवन के लिए ज़रूरी कच्चा माल अपनी आदिम अवस्था में .

Virendra Kumar Sharma said...

शुक्रिया भाई साहब इस महत्व पूर्ण अपडेट के लिए .


चाँद को मात देगी उसकी चमक

Rare supercomet to outshine Moon in '13

सौर मंडल के बाहरी इलाके से एक सुपर धूमकेतु (जटा धारी महाकाय सितारा )सूरज की तरफ बे -तहाशा दौड़ा आ रहा है .समझा जाता है नवम्बर 2013 में यह सूर्य के नजदीक तम होगा .तब

इसकी

चमक अपने चन्दा को मात देने लगेगी .

यह पहली मर्तबा सितम्बर 2012 में प्रेक्षण में लिया गया था .इसे खगोल विज्ञान के माहिरों ने नाम दिया है :

C/2012 S1 (ISON).

ISON का विस्तार है -INTERNATIONAL SCIENTIFIC OPTICAL NETWORK (अंतर -राष्ट्रीय वैग्यानिक संजाल ).

नैट वर्क परस्पर सम्बद्ध /जुड़े हुए कम्प्यूटरों का एक विशाल तंत्र होता है .यह रेडिओ दूरबीनों से प्राप्त ब्योरे का संसाधन करता है .


विज्ञान पत्रिका न्यू -साइंटिस्ट ने इस खबर को विस्तार से छापा है सुन्दर चित्रों के साथ .

इसे बेला रूस और रूस के शौकिया खगोल विदों ने ढूंढ निकाला है .

वास्तव में धूमकेतु सूरज के आवधिक मेहमान होते हैं .कुछ 200 साल से पहले ही सूरज से मिलने चले आते हैं इन्हें शार्ट पीरियड कोमेट कहा जाता है .शेष 200 साल के बाद ही मिलन मना पाते हैं

इन्हें लॉन्ग पीरीअड कोमेट कहा जाता है .

हेली का धूमकेतु शार्ट पीरीअड कोमेट है जो हरेक 75 बरस के बाद सूरज से मिलने आता है .

मंगल और बृहस्पति की कक्षा में धूमकेतुओं का एक बादल होता है .कभी कभार जब इनके दीर्घ वृत्ताकार पथ सूर्य की असरकारी गुरुत्व जद में आ जाते हैं .तब सूरज की विशाल गर्मी से यह

धुंधली बर्फीली चट्टानी गेंद पिघलने लगती है .

आरम्भ में धूमकेतु एक धुंधली बर्फीली गेंद सा ही होता है .

इस पिघलाव से बनता है इसका जटाजूट धारी सा सिर (Head of the comet ) .सिर के नीचे रहता है इसका केन्द्रीय भाग न्युक्लिअस . सौर विकिरण के दाब से जो इसे धरती की और ठेलता है

इसकी पूंछ का निर्माण होता है .खरबों बार पृथ्वी विशालकाय धूमकेतुओं की विरलीकृत विशाल काय पूंछ में से गुजर चुकी है इसका बाल भी बांका न हुआ है .

कोई अनर्थ अमंगल ,अनहोनी नहीं लाते हैं धूमकेतु .इनके पृथ्वी से टकरा जाने की संभावना भी अति क्षीण रहती है .और अब तो पृथ्वी से रोकिट दाग कर इनका परिक्रमा पथ भी ठेला जा सकता है

विचलित किया जा सकता है .

लम्बी तान के सोइये .

पृथ्वी पर जीवन के लिए ज़रूरी कच्चा माल सुदूर अतीत में धूमकेतुओं से ही आयातित हुआ था .कुछ खगोल विद ऐसा मानते आयें हैं जिनके अगुवा रहें है फ़्रेड होइल .

एक और अनुमान के अनुसार अब से कोई साढ़े छ :करोड़ बरस पहले एक विशालकाय धूमकेतु के पृथ्वी से आ टकराने से विशालकाय प्राणी धूमकेतुओं का सफाया हुआ माना जाता है .

सूरज की हरेक परिक्रमा में इन के द्रव्यमान का 10 % भाग गल खप जाता है .इनके टुकड़े ही हैं उल्काएं जिनकी चन्द्र सतह पर बरसात होती रहती है लेकिन पृथ्वी पर पहुँचने से पहले ये टुकड़े जल

खप जातें हैं .कभी कभार ही इनके अधजले अंश पृथ्वी पर पहुँच पाते हैं .

ध्रुवीय प्रदेशों में बरफ (हिमराशी )के नीचे सैंकड़ों धूमकेतु (छोटे बड़े )दबे पड़ें हैं .इनमे मौजूद हो सकता है जीवन के लिए ज़रूरी कच्चा माल अपनी आदिम अवस्था में .

एक प्रतिक्रिया ब्लॉग पोस्ट :

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Virendra Kumar Sharma said...

शुक्रिया भाई साहब इस महत्व पूर्ण अपडेट के लिए .


चाँद को मात देगी उसकी चमक

इससे पूर्व की एक टिपण्णी स्पेम में जा चुकी है .कृपया निकालें

ePandit said...

इन्तजार है जी इसका, धन्यवाद जानकारी के लिये।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 27 -12 -2012 को यहाँ भी है

....
आज की हलचल में ....मुझे बस खामोशी मिली है ............. संगीता स्वरूप . .

vandana gupta said...

इंतज़ार रहेगा

यशवन्त माथुर said...

बहुत रोचक अंदाज़ मे आपने जानकारी दी है सर!


सादर

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

रोचक जानकारी मिली ...

अभिषेक मिश्र said...

धन्यवाद। इंतजार रहेगा इसके आगमन का।

Naveen Mani Tripathi said...

bahut hi rachak prastuti ....abhar

Virendra Kumar Sharma said...



नववर्ष शुभ हो ,खुश हाली लाये चौतरफा आसपास आपके .नव वर्ष शुभ हो ,खुश हाली लाये चौतरफा आपके आसपास .

Virendra Sharma ‏@Veerubhai1947
ram ram bhai मुखपृष्ठ http://veerubhai1947.blogspot.in/ बृहस्पतिवार, 27 दिसम्बर 2012 दिमागी तौर पर ठस रह सकती गूगल पीढ़ी


1mVirendra Sharma ‏@Veerubhai1947
आरोग्य प्रहरी ...... http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/2012/12/blog-post_8739.html …

प्रवीण पाण्डेय said...

तमाशा तो अच्छा रहेगा, पर यदि पृथ्वी पर गिरा तो बहुत कष्टकारी होगा।

ताऊ रामपुरिया said...

जरूर देखेंगे इस तमाशे को, बहुत उपयोगी जानकारी दी आपने.

रामराम.

प्रेम सरोवर said...

आपकी प्रस्तुति अच्छी लगी। मेरे नए पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी। नव वर्ष 2013 की अग्रिम शुभकामनाओं के साथ। धन्यवाद सहित।

प्रेम सरोवर said...

आपकी प्रस्तुति अच्छी लगी। मेरे नए पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी। नव वर्ष 2013 की अग्रिम शुभकामनाओं के साथ। धन्यवाद सहित।

Akash Mishra said...

बहुत रोचक जानकारी साथ ही साथ ज्ञान वर्धक भी |
माफ कीजियेगा मुझे एक बात पूछनी है - ग्रेट कमेट ऑफ १८६० है या ग्रेट कमेट ऑफ १६८० या फिर दोनों ?(मेरी जानकारी बहुत सीमित है)

सादर

Arvind Mishra said...

आकाश ,
आभार, यह ग्रेट कामेट आफ 1680 ही है -असावधान त्रुटि के खेद है !