Friday, 12 March 2010

क्या सचमुच महिलायें एक बेहतर अन्तरिक्ष यात्री बन सकती हैं?

सांद्रा  मैग्नस जो एक महिला अन्तरिक्ष यात्री रही हैं के अंतिरक्ष से की गयी ब्लागिंग पर हमने कुछ समय पहले लिखा था .एक खबर चीन से है जिसने महिला अन्तरिक्ष यात्री के चुनाव की घोषणा की है .चीन के समानव अन्तरिक्ष अभियान के डिप्टी कमांडर झेंन  जियांगी ने ने एक साक्षात्कार में बताया है कि "हमने चयन में नारी और पुरुष अन्तरिक्ष यात्रियों के लिए समान ही मानदंड रखे ,बस केवल अंतर रहा कि हमने विवाहित महिला अन्तरिक्ष यात्री को प्राथमिकता दी है क्योंकि हम जानते हैं कि विवाहितायें शारीरिक और मानसिक तौर  पर ज्यादा सुदृढ़ होती हैं " उन्होंने आगे जोड़ा कि " सहन क्षमता और चौकसी में भी महिला अन्तरिक्ष यात्री ज्यादा सफल होंगी!"  क्या वाकई ?

 सबसे पहली अन्तरिक्ष यात्री थीं रूस की वैलेन्ताइना टेरेस्कोवा (१९६३)-अमेरिकी महिला अन्तरिक्ष यात्रिओं का सिलसिला १९८३ से शुरू हुआ और अब तक कई अमेरिकी महिलाएं अन्तरिक्ष यात्री बन चुकी हैं -यह आशंका हमेशा रही है कि अन्तरिक्ष के   विकिरण प्रजनन प्रणाली पर विपरीत प्रभाव डाल सकते हैं  इसलिए विवाहिता के ही अन्तरिक्ष यात्रा  के लिए चयनित करने पर सहमति रही है यद्यपि अन्तरिक्ष यात्राओं के बाद भी कई महिला अन्तरिक्ष यात्री स्वस्थ बच्चों को जन्म दे चुकी हैं .अभी चीन ने दो भावी महिला अन्तरिक्ष यात्रिओं का चयन तो  किया है मगर उनका नाम पता गुप्त रखा है .

इंग्लैण्ड का गार्जियन अखबार अपने ऑनलाइन संस्करण में इन दिनों एक रायशुमारी करा रहा है कि क्या सचमुच महिलायें एक बेहतर अन्तरिक्ष यात्री बन सकती हैं,क्योंकि माना जा रहा है कि वे बेहतर संचार की कुशलता और अकेलेपन से निपटने की क्षमता भी रखती हैं.जहाँ २७.१ प्रतिशत लोगों ने यह कहा है कि सचमुच ऐसा ही है जबकि ७२.९ प्रतिशत लोगों के विचार है कि "जेंडर मेक्स नो डिफ़रेंस !" आपका का क्या ख्याल है ?

14 comments:

Mithilesh dubey said...

"जेंडर मेक्स नो डिफ़रेंस !"

बिल्कुल सहमत हूँ ।

निर्मला कपिला said...

वे बेहतर संचार की कुशलता और अकेलेपन से निपटने की क्षमता भी रखती हैं
क्या पुरुष भी ऐसा मानते हैं। हा हा हा । बहुत अच्छी जानकारी । धन्यवाद इस आलेख के लिये।

सतीश सक्सेना said...

बढ़िया और अनूठा लेख , निस्संदेह महिला अन्तरिक्ष यात्री बनाने में सक्षम है और यह कई मौकों पर सिद्ध भी हो चूका है

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

महिला हो या पुरुष इस से कोई अंतर नहीं पड़ेगा। पर किसी यात्रा पर केवल पुरुष और किसी पर केवल महिलाएं भेजी जाएं तब पता लग सकता है कि क्या बेहतर है। वैसे किसी यात्रा पर दोनों आधे-आधे हों तो बेहतरीन होगा।

गिरिजेश राव said...

पढ़ लिया सर!
बाकी इस विषय के बारे में कुछ नहीं जानता।
जानकारी में बढ़ोत्तरी हुई, इसके लिए धन्यवाद।

mukti said...

i do agree with you. nothing to say more.

अल्पना वर्मा said...

गार्जियन अखबार का जो निष्कर्ष निकलेगा पढ़ लेंगे. इस विषय में हम अज्ञानी हैं .

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत रोचक आलेख. अब विकिरण वगरैह के प्रजनन क्षमता पर प्रभाव तो स्त्री पुरुष दोनों पर ही समान होने चाहिये. वैसे अपनी व्यक्तिगत राय में हर काम महिला ज्यादा कुशलता से करती है भले ही वो मेड-इन-जर्मन चलाने का ही क्युं ना हो.

रामराम.

Ghost Buster said...

...विवाहितायें शारीरिक और मानसिक तौर पर ज्यादा सुदृढ़ होती हैं...

अगर आशय यह है कि "विवाहिताओं" को "विवाहितों" से ज्यादा मुसीबतें झेलनी होती हैं, तो सहमत होना मुश्किल लगता है. :o)

सतीश पंचम said...

जानकारी तो अच्छी मिली।

लेकिन लगातार यही स्त्री-पुरूष विषय हर जगह चलते रहने से बोरियत सी होने लगी है ऐसे सब्जेक्टस पर। सो नये विषय जैसे राजनीति, हास्य या कहें साईंस से ही संबंधित ( छठी का दूध वाली पोस्ट, हिरन और मृग में अंतर वाली wild life से संबंधित 'क्या आप जानते हैं' वाली आपकी बेहतरीन पोस्टें हैं ) ऐसी पोस्टें आये तो रोचकता बनी रहे और मजा भी आए।

कृपया अन्यथा न लें..... लगातार पोस्टों में हर ओर स्त्री-पुरूष, नर-नारी विषयों से बोरियत संबंधित यह मेरा निजी मत है, बाकी मैं और लोगों की मन की बात नहीं कह सकता कि उन्हें क्या पसंद है क्या नहीं :)

Udan Tashtari said...

रोचक आलेख...हम ७२.९% के साथ हैं.. "जेंडर मेक्स नो डिफ़रेंस !"

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

अच्छी जानकारी...। आभार।

कृष्ण मुरारी प्रसाद said...

आप पूछ रहे हैं या बता रहे हैं?
लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से
http://laddoospeaks.blogspot.com/

हिमांशु । Himanshu said...

अब तो महिलाओं की कुशलता सर्वसिद्ध है । बिलकुल बन सकती हैं । "जेंडर मेक्स नो डिफ़रेंस !"

जानकारी का आभार ।