Monday, 18 August 2014

इबोला ने धावा बोला!



इबोला यानि ई वी डी(Ebola virus disease)  -इबोला हीमोरजिक फीवर नर वानर समुदाय का रोग है जो इबोला विषाणु से होता है। विषाणु के संक्रमण के बाद दो दिन अथवा तीन सप्ताह के बाद भी लक्षण उभर सकते हैं। लक्षणों में इन्फ्लुएंजा जैसा बुखार, गले में खरास , मांसपेशियों में दर्द और सरदर्द हैं. कुछ भी निगलने में कठिनाई भी हो सकती है। तत्पश्चात वमन (उल्टी /कै) दस्त और शरीर पर चकत्ते होते हैं और लीवर और गुर्दे ठीक से काम नहीं करते। खून की उल्टियाँ भी होती हैं.  मरीज के शरीर के भीतर और बाहर भी रक्तस्राव शुरू हो जाता है। यह जानलेवा है।

इस विषाणु का संक्रमण पहले से ही संक्रमित मुख्यतः कपि वानरों या दूसरे जानवरों या मनुष्य के रक्त सम्पर्क या शारीरिक द्रव से संपर्क से हो सकता है। मनुष्य से मनुष्य में यह फ़ैल रहा है, अभी तक अफ्रीका में इसका ज्यादा कोप है मगर अब यह विश्वव्यापी बीमारी का स्वरुप लेता जा रहा है. कहा जा रहा है कि चमगादड़ों की एक प्रजाति (फ्रूट बैट ) बिना इससे प्रभावित हुए इसे फैला रही है। चूंकि मलेरिया, हैजा और अन्य विषाणु जनित रोगों के लक्षणों से इबोला के लक्षण मिलते जुलते हैं अतः इसके निर्णायक निदान /पहचान के लिए वाइरल प्रतिपिण्डों की जांच रक्त सैम्पल से की जाती है।

बचाव ही इसका कारगर उपाय है क्योकि अभी तक इसका प्रभावी टीका और शर्तिया इलाज सुलभ नहीं है.मांसभोजी मांस को छोटे वक्त हाथों पर दास्ताने पहने और अच्छी तरह उसे पकाएं। और किसी मरीज के आस पास या संपर्क में होने पर हाथों को साबुन से अच्छे ढंग से साफ़ करते रहे।अभी तक मृत्यु दर 50 से 90 के बीच देखी जा रही है। यह सबसे पहले सूडान और कांगो से पहचाना गया -और वर्ष 1976 से ही सहारा अफ्रीका के क्षेत्रों में देखा जाता रहा है। लगभग दो हजार लोग इसके चपेट में आ चुके हैं। इस समय यह महामारी का रूप ले चुका है और पश्चिमी अफ्रीका के गुएना, सिएरा लियोन और लाबेरिया तथा नाइजेरिया में कहर बरपा रहा है। एक हजार से अधिक लोग अब तक मर चुके हैं। वैक्सीन को विकसित करने के प्रयास युद्ध स्तर पर हैं मगर कोई कारगर सफलता नहीं मिल सकी है।

9 comments:

निर्मला कपिला said...

चिन्ता की बात है। बहुत अच्छी जानकारी । आभार।

देवेन्द्र पाण्डेय said...

भयावह

Harivansh sharma said...

क्या यह मांस खाने वालो में अधिक पाया जाता हैं या उनसे विकसत होता है? कुच्छ समय पहले चिकन गुनिया,मुर्गी से विकसित हुवा। काव मेडनेस इंग्लैंड जैसे देश में गों मांस से विकसित हुवा। सवाईन फ्लू सुवर के मांस से विकसित हुवा।और अब यह! आखिर कार यह भी जानलेवा है।
अपने प्रति स्वच्छता ओर सावधानी एक मात्र विकल्प है।

HARSHVARDHAN said...

इबोला वायरस के बारे में सचेत करती हुई अच्छी जानकारी। सादर।।

नई कड़ियाँ :- भारत के राष्ट्रीय प्रतीक तथा चिन्ह

इबोला वायरस (Ebola Virus) : एक जानलेवा महामारी

Virendra Kumar Sharma said...


कुंवर कुसुमेशजी ,आपने इबोला विषाणु जन्य बीमारी का मूल स्रोत खोलके बड़ा उपकार किया है। ब्लॉगर बंधुओं के हितार्थ मैं इसे हिंदी में रख रहा हूँ यहीं से :

इबोला मनुष्यों ,के अलावा बंदरों चिम्पांजियों को होने वाला एक विषाणुजन्य रोग है जिसका फिलवक्त कोई इलाज़ नहीं है अलबत्ता इसके लक्षणों का शमन मुमकिन है।कोंगों देश में इबोला नाम की एक नदी बहती है इसी के नाम पर इसे इबोला कहा जाता है। इस रोग का पता सबसे पहले १९७६ में यहीं चला था।

संक्रमित प्राणियों के रक्त के अलावा शरीर से होने वाले अन्य रिसावों के संपर्क में आने से यह बीमारी स्वस्थ प्राणियों को हस्तांतरित हो जाती है। रोगी को लगाईं जा चुकी सिरिंजों से सम्पर्कित होने और संक्रमित पशु का मांस खाने से भी यह बीमारी हो जाती है।

फिलवक्त इस रोग का कोई मानक इलाज़ नहीं है सिवाय इसके की संक्रमित व्यक्ति को अलग थलग दूर रखा जाए शेष जनों से। तरल पदार्थ लगातार दिए जाए ताकि इलेक्ट्रोलाइट बेलेंस न गड़बड़ाए रोगी शरीर का। रक्तसार्व शरीर के अंदरूनी या बाहरी अंगों से होने पर फ़ौरन रक्तापूर्ति भी की जाए।

कमज़ोरी से शुरुआत होती है इसके लक्षणों की। हैमरेजिक फीवर के अलावा पेशीय पीड़ा (मसल पेन ),सिर दर्द और गले में दर्द (दुखन )इसके दीगर लक्षण हैं। अतिसार के साथ मतली भी रोगी को आती है आ सकती है। अंदरूनी अंगों में रक्तसार्व के अलावा चमड़ी पे चकत्ते भी देखे जा सकते हैं।

बचाव ने ही बचाव। घबराने की कोई वजह नहीं है। एक प्रतिक्रिया ब्लॉग पोस्ट :

unwarkusumesh.blogspot.com/2014/08/blog-post_10.html

नई बिमारी आ गई,मचा हुआ कुहराम।

दिया डॉकटरों ने इसे,नया"इबोला"नाम।।

नया"इबोला"नाम,चली ये अफ्रीका से।

बारह दिन में सिर्फ,उठा दे यह दुनिया से।

रहिये बड़े सतर्क,छोड़ कर दुनियादारी।

अब तक नहीं इलाज,ये ऐसी नई बिमारी।।
पसंद
भले इबोला वायरस का कोई इलाज़ नहीं है लेकिन इससे घबराने की भी कोई वजह नहीं है। ये संक्राम्य बीमारी ज़रूर है लेकिन ऐसी भी नहीं जिससे बचा न जा सके।

यह संक्रमण इबोला से असरग्रस्त व्यक्ति के बॉडी ओर्गेंस ,शरीर के विभिन्न अंगों ,रिसने वाले स्रावों ,फ्लुइड्स मसलन लार ,कफ ,रक्त ,वीर्य आदि के संपर्क में आने से फैलता है। एयर बोर्न संक्रमण नहीं है तबेदिक की तरह।

इसके लक्षणों में हेमोरेजिक फीवर भी है जो शरीर के अनेक प्रमुख अंगों ,मल्टिपिल ऑर्गेन सिस्टमों(Multiple organ systems ) को एक साथ असरग्रस्त कर सकता है।

लक्षणों की शुरुआत बेहद की कमज़ोरी से हो सकती है। पेशियों में दर्द (पेशीय पीड़ा ,मसल पेन )हो सकता है। सर दर्द और गले में दुखन (सोर थ्रोट,sore throat ) ) भी हो सकती है।

गुर्दों और यकृत(impaired kidney and lever functions ) के प्रकार्य , काम करने में बाधा पेश आ सकती है।शरीर के अंदरूनी अंगों से और बाहर भी रक्त स्राव हो सकता है।

भले इसका कोई इलाज़ न सही इसके लक्षणों का सुचारू रूप शमन किया जा सकता है। मसलन शरीर में रक्त एवं जल की कमी को मुल्तवी रखा जा सकता है।

बस शरीर के प्रमुख अंग ठीक से काम करते रहें ऐसी व्यवस्था को सुनिश्चित किया जाए।

Virendra Kumar Sharma said...

Ebola outbreak: What every Indian should know

Health Minister Harsh Vardhan on Monday said "there is no Ebola Virus Disease (EVD) in India", adding the country has mechanism for prompt treatment and subsequent monitoring.



"There is no EVD in India," he said in a statement. "There is no reason for getting worried over the odd case of a visitor to the country arriving in an indisposed condition. We have all the mechanisms in place for prompt treatment and subsequent monitoring."


To prevent Ebola virus entry and spread of EVD in India, Directorate General of Civil Aviation (DGCA) has issued directives to all airlines operating on international routes. The airlines have been asked to take following precautionary measures with immediate effect: In flight announcement should be made for self-reporting by travellers who have any signs or symptoms of EVD. The copy of the announcement has been provided to the airlines .

Instructions have been issued for self-reporting by travellers who suffer any signs or symptoms of EVD to APHO/medical unit for travelers; and travellers on flights are to be given the health-form for submitting information regarding visit to any affected country during last 21 days and having symptoms of EVD during travel or on arrival.

How worrying is Ebola?

But what is Ebola and how scary is it? Or for that matter, is there any genuine reason to worry?

There is no cure for Ebola hemorrhagic fever. More than half of people infected in this outbreak have died. Death rates in some past outbreaks reached 90 percent.

It's a cruel end that comes within days. Patients grow feverish and weak, suffering through body aches, vomiting, diarrhea and internal bleeding, sometimes bleeding from the nose and ears. The damage can spiral far beyond the patients themselves.

Because it's spread through direct contact with the bodily fluids of sick patients, Ebola takes an especially harsh toll on doctors and nurses. Outbreaks spark fear and panic.

Virendra Kumar Sharma said...

The outbreak began in Guinea in March before spreading to neighboring Sierra Leone and Liberia. A traveler recently carried it farther, to Nigeria, leading to a few cases in the giant city of Lagos.

Ebola is devastating for those it affects. But most people don't need to fear it. Why?

Ebola doesn't spread easily, the way a cold virus or the flu does. It is only spread by direct contact with bodily fluids such as blood, saliva, sweat and urine. Family members have contracted it by caring for their relatives or handling an infected body as part of burial practices. People aren't contagious until they show symptoms which may not appear until 21 days after exposure.

minuscule compared with other diseases that killing millions of people. The common diseases have far lower mortality rates. They kill so many people because such huge numbers are infected. In comparison, Ebola is manageable.

Virendra Kumar Sharma said...

Indians in Africa not panicking

Probably that's why there is no panic movement out of West Africa by Indian nationals living in the region.

"There have been a few calls from people who were anxious about the disease, whilst others have expressed the desire to leave Nigeria, but there has not been any urgent need to move out," Sharad Srivastava, first secretary in the Indian high commission in Abuja, the Nigerian capital, said. The mission in Abuja is also accredited to Benin, Cameroun and Chad.

"Nobody is packing out and we do not have any information from other countries - that we are accredited to - showing that there is any panic among the Indian community," T.J. Suresh, information counsellor of the Indian high commission in Accra, the Ghanaian capital, said.

A few Indians on the streets of Accra said they were keenly following the news about the situation.

"I have heard of Ebola but fortunately there is no such case in Ghana so it is not as scary," businessman Mukesh Rao said.

Another businessman, A. Jain, said that "life is normal and from the information that is being passed around, Ebola, though scary, is not spread when you are careful not to get into a situation where you touch those who are infected with the virus".

In Nigeria, the Indian high commission has issued an advisory on its website to guide Indian nationals.

Among other things, it says: "Nigeria has declared Ebola outbreak a national emergency and is taking steps to contain its spread."

It also cautioned "all Indian residents in Nigeria and those planning to undertake unavoidable travel to Nigeria to adhere to the dos and donts circulated by the ministry of health and family welfare, government of India".

"As the disease is not airborne and is transmitted only through contact with body fluids of the affected, personal hygiene is a critical preventive measure," the advisory said and asked nationals to contact the high commission for any further assistance.

Virendra Kumar Sharma said...

अरविन्द भाई साहब आपका इस विज्ञान यज्ञ से यूँ ही जुड़े रहना लाज़मी है। भले मुख चिठ्ठे पर विराजिये।