Friday, 17 August 2012

खटमलों की वापसी


खबर अमेरिका से है ...मगर आज के इस आवागमन युग में इनका आतंक दुनिया में कहीं से कहीं तक भी फ़ैल सकता है . कहते हैं ये  नन्हे वैम्पायर हैं जो मानव खून के प्यासे हैं . वैसे तो खटमल (बेड बग्स ) मनुष्य के साथ उसके गुफा जीवन से ही जुड़े हैं मगर सभ्यता और साफ़ सफाई से इनका आतंक कमतर होता गया. १९४० के बाद से  विकसित देशों में खटमलों का सफाया कीटनाशी रसायनों के चलते पूरी तरह  हो गया .मगर अब इन देशों में कीट नाशी भी ज्यादा इस्तेमाल में नहीं हैं . लोग पूरी दुनिया में घूम रहे हैं और खटमलों को भी सूटकेस और सामानों के साथ ले आ जा रहे हैं .. 
अब अमेरिका में तो इन नन्हे दैत्यों ने ख़ासा उत्पात मचा रखा है . वे होटलों ,घरों ,नर्सिंग होम ,शयन कक्षों .कार्यालयों और सिनेमा घरों में डेरा जमाये बैठे हैं . सबसे बड़ी समस्या यह है कि ये मौसम के भारी अंतरों -तेज गर्मी और ठंड में ,सूखे और सीलन में अपने को बचाए रखने में सक्षम हैं. ज्यादा ठंडक में ये शीत निष्क्रियता में चले जाते हैं . अनुकूल मौसम आते ही सक्रिय हो  उठते हैं ..बिना खाए वर्ष पर्यंत जिन्दा रह सकते हैं ...एक बेडरूम में हजारो की संख्या में हो सकते हैं . ये गद्देदार आसनों के मुरीद हैं ..कुशन और  बिस्तरों को बहुत पसंद करते हैं .गद्दे के पोरों में और इलेक्ट्रिक साकेट में भी पनाह ले लेते हैं . ये रात में आपके खून के प्यासे हो उठते हैं और आपके सांस की गर्मी से सक्रिय हो उठते हैं -इनके ऊष्मा संवेदी अंग -एंटीना आपकी मौजूदगी को सहज ही भांप लेते हैं . 
Photo credit: Utah Department of Health
अगर सुबह उठने पर आपके शरीर पर लाल रैशेज -चकत्ते दिखें तो वे खटमल के काटे हुए निशान भी हो सकते हैं ....बिस्तर पर  लाल धब्बे आपके खून के हो सकते हैं ...अमेरिका में यह सब जानकारी इसलिए दी जा रही है कि वहां कई पीढ़ियों तक लोगों ने खटमल देखा भी नहीं है -मगर भारत की नयी पीढी हो सकता है इनके बारे में न जानती हो मगर पुन्नी पीढियां जो आज बाप दादों की क़तर में हैं इनसे परिचित हैं ....अगर अमेरिकी प्रवासी आपके यहाँ आने वाले हैं तो होशियार रहिये और उन्हें अलग कमरा ,बेड आदि देकर पहले खटमल -निरोधन की व्यवस्था करिए ....नहीं तो ये  अनचाहे विदेशी मेहमान आपके घर में आ घुसेगें और आपको पता भी नहीं लगेगा . 

7 comments:

Vivek Rastogi said...

हम भी इनसे सीजन में बहुत परेशान होते हैं, वैसे आजकल नहीं हैं, परंतु अप्रैल से जून तक तो बेहिसाब परेशानी, हमने कहीं पढ़ा था कि अगर खटमल को ३० दिन तक खून नहीं मिले तो ये जिंदा नहीं रहते ।

dharam tang said...

ham to wo zahar hai jo khatmal ke katne par b khun na nikle
khotej.blogspot.com
aapke swagat mein

प्रवीण पाण्डेय said...

जीवट राक्षस हैं ये..

Shanti Garg said...

very good thoughts.....
मेरे ब्लॉग

जीवन विचार
पर आपका हार्दिक स्वागत है।

Virendra Kumar Sharma said...

लखनऊ सम्मान मुबारक !ब्लोगर धर्म मुबारक !यहाँ भाई साहब कैंटन (मिशगन राज्य )में तो इनका खटमल बहादुरों का जो तमाम गुण कोक्रोंच वाले लिएँ हैं प्रकोप बिलकुल भी नहीं है .यहाँ की प्रतिकूल परिश्थिति में मानव प्रवास से पहले भी कॉफ़ी अन्वेषण किये गए थे यहाँ सर्दियों में तापमान कई मर्तबा मैंने शून्य से १४ से २२सेल्सियस अपने फरवरी मॉस के प्रवास के दौरान भी देखा है फिर जन विरलता है फिर मोटरों के शहर डेटरोइट (कैंटन उपनगर है छोटा शहर है ,डेटरोइट बड़ा ,दोनों वैनस्टेट काउंटी में आतें हैं )में मानुस बहुत कम हैं .खटमल ज़िंदा कैसे रहे .कितना चलेगा बेचारा एक आदमी को ढूँढने .वहां भारत में तो सरकार और राज दोनों इनका है .एक रानी बग है रिमोटिया सरकार की .हर तरफ मानुस ही मानुस हैं .आम भी ख़ास भी .खून चूसने पे कोई पाबंदी नहीं .जितना मर्जी जिसका चूसो .
ब्लोगर सम्मान मुबारक !
बुधवार, 29 अगस्त 201
मिलिए डॉ .क्रैनबरी से
मिलिए डॉ .क्रैनबरी से

Vikas Gupta said...

अब तो हमें भी खटमलों सें डर लगने लगा है ।

faiza khan said...

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