Tuesday, 20 July 2010

एक मछली जो वैज्ञानिको को छकाती रहती है!

आज बनारस के दैनिक जागरण ने एक सचित्र खबर प्रमुखता से छापी है जिसमें एक मछली के आसमान से बरसात के साथ टपक पड़ने की खबर है.मछलियों की बरसात की ख़बरें पहले भी सुर्खियाँ बनती रही  हैं ,पूरी दुनिया में कहीं न कहीं से मछलियों के साथ ही दूसरे जीव  जंतुओं  की बरसात होने के अनेक समाचार हैं .बनारस में कथित रूप से आसमान से टपकी मछली कवई मछली है जो पहले भी वैज्ञानिकों का सर चकराने देने के लिए कुख्यात रही है .

यह कभी पेड़ पर मिलती है तो जमीन पर चहलकदमी करते हुए दिखी है ...इसका इसलिए ही एक नाम क्लायिम्बिन्ग पर्च है .अब इस बार यह बरसात की बूंदों के साथ जमीन पर आ धमकी है यहाँ सारनाथ में जैसा कि कई चश्मदीदों का कहना है. .वैज्ञानिक संकल्पनाएँ करते /देते थक से गए हैं -यह मानसूनी /चक्रवाती हवाओं के चलते पहले बादलों के संग जा मिली और फिर बरस पडी या किसी पक्षी के चोंच से छूट कर धडाम हुई -अब किसी ने यह सब देखा नहीं -बस घनघोर बारिस के बाद यह जमीन पर उछलती हुई दिखी ...बस तमाशबीनो की भीड़ आ  जुटी  .
 दंतकथाओं की जनक कवई (अनाबास ) मछली

यह भी होता है कि भरपूर वर्षा होने पर  जलराशि  नदी नालों की ओर उमड़ पड़ती है और मछलियाँ  चूंकि पानी की धारा के विपरीत चलती है ये नदी नालों से निकल कर   उथली जगहों पर आ जाती हैं .और बरसात के बाद लोग बाहर निकलते ही इनका दर्शन कर आश्चर्य में पड़ जाते हैं और तरह तरह के कयास लगाने लग जाते हैं .सारनाथ में सड़क पर दिखी मछली की यही कहानी लगती है .

यह अनाबस मछली है जो अपने मजबूत पेक्टोरल फिन से जमीन पर घिसट घिसट कार आगे बढ सकती है ...चांदनी रातों में इसे एक तालाब से दूसरे तालाब पर झुण्ड में इसे  जाते देखे जाने की रपटे हैं !

17 comments:

सुधीर said...

kafi achhi jankar di aapne.

नीरज जाट जी said...

बढिया जानकारी।

प्रवीण पाण्डेय said...

रोचक जानकारी।

seema gupta said...

बेहद रोचक विषय

regards

वाणी गीत said...

रोचक ...!

सतीश सक्सेना said...

नवीन जानकारी दी आपने, अरविन्द भाई शुक्रिया !

अल्पना वर्मा said...

यह कभी पेड़ पर मिलती है तो जमीन पर चहलकदमी करते हुए दिखी है ..अब इस बार यह बरसात की बूंदों के साथ जमीन पर आ धमकी है!
[aap ke 'sense of humour' ka jawab nahin!:D
--Rochak aur gyanvardhak jaankari!
dhnywaad.

अल्पना वर्मा said...

इस 'एक मछली 'के कारण .बच्चों की कविता --मछली जल की रानी है जीवन उसका पानी है....बाहर निकालो मर जायेगी ...को बदलना पड़ेगा.

राज भाटिय़ा said...

सहमत है जी आप से

Arvind Mishra said...

अल्पना जी ,आपने बिलकुल सही मार्क किया - काव्य सत्य और वैज्ञानिक सत्य के बीच अक्सर ऐसी धीगामुश्ती दिख जाती है!मन तो यही होता है कि काश सभी काव्य सत्य ही सच हुआ करते मगर आप भी जानती हैं कि ऐसा है नहीं !

ali said...

आज की टिप्पणी : अल्पना जी से सहमति :)

उन्मुक्त said...

मैं तो यही समझता यह चक्रवाती हवाओं के कारण होता है।

निर्मला कपिला said...

रोचक जानकारी है धन्यवाद।

Udan Tashtari said...

जीवों का अद्भुत संसार..बढ़िया रोचक जानकारी.

डॉ टी एस दराल said...

पहले भी सुना था इस बारे में । लेकिन कारण अब तक समझ नहीं आया ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अद्भुत जानकारी

Mukesh Kumar Mishra said...

प्रकृति समय-समय पर हमें अपने उत्कृष्ट रूपों का दर्शन कराती रहती है। मछली के विषय में प्रसिद्ध है कि वह मात्र जल में ही रह सकती है।
इस अद्भुत विस्मयकारी मत्स्य के विषय में पढ़कर इसके विषय में और अधिक जानने की इच्छा बलवती हो उठी है। आप चूँकि इस विषय के विशेषज्ञ हैं अतः हम आप से आशा कर सकते हैं कि आप इस विषय में जानकारियों एवं शोधों से हमें अवगत कराते रहेंगे।
बहुत ही रोचक एवं ज्ञानवर्द्धक आलेख है।