Friday, 20 February 2009

पुरूष पर्यवेक्षण -नाभि दर्शन !

विष्णु की नाभि से जन्मे हैं ब्रह्मा ( सौजन्य - वैष्णव वायस )
पुरूष पेट के मानचित्र पर नाभि एक पूरा द्वीप ही है ! और एक खान्च्दार (डिप्रेसन ) रेखा भी नाभि से वक्ष के निचले हिस्से तक जाती है -मगर यह नाभि रेखा ( लीनिया अलवा ) तुंदियल लोगों में नही दिखती .छरहरे युवाओं में यह स्पष्ट और नाभि के नीचे तक भी दर्शनीय है .नाभि की अंतर्कथा बहुत रोचक है -पुराने समय के चित्रकारों के सामने -खासतौर पर ईसाई धर्म के अनुयायी के सामने यह संकट आन पड़ा कि आदम के चित्रों में नाभि दिखाएँ भी अथवा नहीं .क्योंकि आदम 'गर्भजात ' तो थे नहीं और जब "ईश्वर ने मनुष्य को अपनी ही इमेज में बनाया " है तो ईश्वर को भी नाभि तो होनी ही चाहिए ! यह उधेड़बुन चलती रही ! हिन्दू पुराण -दर्शन में कोई भ्रम नही रखा गया -क्षीर सागर में शयनरत विष्णु की नाभि तो दिखायी ही गयी उससे एक कमल नाल और कलमल पुष्प और उस पर विराजे ब्रह्मा को को भी दर्शित किया गया ।
सबसे रोचक मामला तो तुर्कों का है जिनकी एक दंतकथा के मुताबिक जब अल्लाह मियाँ ने पहला आदमी बनाया तो शैतान आग बबूला हो उठा और नवजात पर हिकारत से थूक बैठा और वह थूक नवजात के पेट के बीचों बीच आ गिरा -मगर अल्लाह के उस थूक के तुरंत हटाने की जल्दी में कि कहीं यह पूरे शरीर तक न फैल जाय एक गड्ढा सा बन गया जो नाभि(बोडरी) कहलाया ! बुद्ध दर्शन भी नाभि को बडी महत्ता देता है और उसे ब्रह्मांड का का केन्द्र तक मानता है !
नारी नाभि तो कामुकता के परिप्रेक्ष्य में ली जाती है मगर पुरूष नाभि इस अल्न्कारिकता से वंचित ही है -सब जानते हैं कि नाभि माँ के पेट में उससे प्लेसेंटा के जरिये जुड़ कर पोषण प्राप्त करने का माध्यम रही है इसलिए नाभि नाल सम्बन्ध को जीवन दाई सम्बन्ध के रूप में देखा जाता है !
पेट को गुदने गुदाने के परिक्षेत्र के रूप में भी बड़ा फोकस मिला है !
पेट पर्यवेक्षण के बाद हम अब कूल्हे तक आ पहुँचते हैं !
जारी ....

16 comments:

P.N. Subramanian said...

बहुत ही सुंदर और रोचक. हमें जीवन में पहली बात ईसाईयों के धर्म संकट का भान हुआ. अब पुराणी पोस्ट पढ़नी है. तीन दिनों से पूरेइलाके में नेट बंद पड़ी थी. आभार.

विनय said...

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ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर जानकारी मिल रही है, इस श्रंखला में हमेशा की तरह अगले भाग का इंतजार है.

रामराम.

Anonymous said...

....................

Shastri said...

डा अरविंद, आज Science Reporter का फरवरी अंक पढते समय मैं खुशी से उछल पडा जब डार्विन पर आप का लेख दिखा. यह हम सब के लिये बहुत ही खुशी की खबर है.

अब आते हैं आज के आलेख पर.

1. आलेख जानकारीपूर्ण है

2. काश नाभि के वैज्ञानिक पहलू पर दोचार पेराग्राफ और जोड देते तो सोने में सुहागा हो जाता.

3. आप के लेआऊट के बारे में मेरी शिकायत जारी है एवं लगता है कि अब हडताल पर बैठना पडेगा!!

सस्नेह -- शास्त्री

Arvind Mishra said...

@शास्त्री जी ,मैंने कुछ सीमा तक आपकी संस्तुति मन तो ली है -अगली पोस्ट से शिकायत दूर हो जायेगी ! और हाँ साईंस रिपोर्टर के चार्ल्स डार्विन वाले लेख पर प्रोत्साहन के लिए आभार !

योगेन्द्र मौदगिल said...

वाह............ मज़ा आ गया आपके अन्वेषण में तो वाह...

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर लगा, आप का आज का लेख.
धन्यवाद

हिमांशु said...

तुर्कों की दंतकथा का तो पता ही नहीं था हमें. रोचक.

उन्मुक्त said...

साइंस रिपोर्टर न सही पर कम से कम इस चिट्ठे पर डारविन के बारे में लेख पढ़ पा रहे हैं।

अरविन्द जी, इन टिप्पणियों में कुछ स्पैम की श्रेणी वाली भी हैं। यदि आपने कमेंट मॉडरेशन का विकल्प नहीं रखा है तो उसे ले लें और इस तरह की टिप्पणियों को न प्रकाशित करें।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

महत्‍वपूर्ण जानकारी के लिए आभार।

arun prakash said...

सारी दुनिया में पाप करने के दो ही रास्ते है जहाँ आदमी मजबूरी me पाप कर बैठता है एक नाभि से ऊपर के लिए और एक नाभि se नीचे के लिए .... ये दोनों निर्देशांको पर तथाकथित पाप का रेखाचित्र खींचा जा सकता है

गिरीश बिल्लोरे said...

अति उत्तम

goved prasad Raj said...

नाभी के बारे में जानकारीयॉ कम ही लोगों ने दी है जो भी दी है एक सी ही है आप की जानकारी बहुत अच्‍छी लगी नाभी चिकित्‍सा नाम सेे एक पूरी चिकित्‍सा है परन्‍तु यह लुप्‍त होने की कगार पर है ।

goved prasad Raj said...

नाभी से सम्‍बन्धित और भी जानकारीया हमारे पास उपलब्‍ध है ।

goved prasad Raj said...

नाभी के बारे में जानकारीयॉ कम ही लोगों ने दी है जो भी दी है एक सी ही है आप की जानकारी बहुत अच्‍छी लगी नाभी चिकित्‍सा नाम सेे एक पूरी चिकित्‍सा है परन्‍तु यह लुप्‍त होने की कगार पर है ।