Friday, 19 September 2008

विज्ञान कथा पर राष्ट्रीय परिचर्चा :आमंत्रण !

आमन्त्रण

राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद
(रा0वि0प्रौ0सं0प, नई दिल्ली)

भारतीय विज्ञान कथा लेखक समिति,
फैजाबाद
एवं
भारतीय विज्ञान कथा अध्ययन समिति,
वेल्लोर, तमिलनाडु
के
संयुक्त तत्वावधान में पहली बार

विज्ञान कथा- अतीत, वर्तमान और भविष्य
विषयक

राष्ट्रीय परिचर्चा
(10-14, नवम्बर, 2008)


- आयोजन स्थल -
संजय मोटेल्स एवं रिसार्ट
एअरपोर्ट रोड
वाराणसी

साहित्य की वह सृजनात्मक विधा जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के सम्भावित बदलावों के प्रति मानवीय प्रतिक्रिया को मुखरित करती है विज्ञान कथा कहलाती है। भारत में यद्यपि इस विधा का उदगम स्वर्गीय अम्बिकादत्त व्यास जी विरचित विचित्र वृत्तान्त (पीयूष प्रवाह 1884-1888) से हो गया था और `सरस्वती´ ने भी इस नवीन सम्भावनाशील विधा को प्रोत्साहित किया किन्तु कालान्तर में हिन्दी साहित्य और भारतीय जनमानस में इसे निरन्तर उपेक्षित होना पड़ा। विगत् शती के आठवें दशक से (1980 के बाद) इस विधा की ओर रचनाकारों की रूझान बढ़ी और अनुगत दशकों में इस विधा ने राष्ट्रीय स्तर पर पुन: पहचान स्थापित करने में सफलता पायी। क्या भारतीय परिप्रेक्ष्य में विज्ञान कथाओं के महत्त्व को नकारा जा सकता है?विदेशों में समादृत क्या यह विधा अभी भी भारत के सुधी साहित्यिक जनों, आम जनों और वैज्ञानिकों से दूरी बनाये हुए है? सशक्त और विज्ञ नव भारत-2020 के निर्माण में क्या यह विधा भी कुछ योगदान कर सकेगी? इन्हीं विचार बिन्दुओं पर आधारित है प्रस्तावित राष्ट्रीय परिचर्चा- विज्ञान कथा: अतीत, वर्तमान और भविष्य।
विज्ञान कथा: अतीत, वर्तमान और भविष्य के मुख्य थीम के अन्तर्गत 5 उप थीम है जिसके अधीन 5 तकनीकी सत्रों के विभाजित समूहों में गहन चर्चा-परिचर्चा से एक सुचिन्तित और सुविचारित `बनारस विज्ञान कथा दस्तावेज, 2008´ की निर्मिति हो सकेगी- जो भारत में विज्ञान कथा से जुड़े पहलुओं पर एक सर्वमान्य दिशा निर्देश की भूमिका का निर्वाह करेगी। उप थीम निम्नवत् होंगे।
१- विज्ञान कथा का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य:-
इस थीम के अधीन विज्ञान कथा के वैश्विक और भारतीय विकास की गाथा, विभिन्न प्रवृत्तियों और भारत के विशेष सन्दर्भ में विश्व साहित्य से तुलनात्मक/ विश्लेषणात्मक अध्ययनों को समाहित किया जायेगा।
२- विज्ञान कथा की समझ-एक संज्ञानात्मक पहलू :-
विज्ञान कथा- परिभाषा, प्रकृति एवं स्वरूप, फिक्शन और फंतासी का फ़र्क तथा शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के लिए विज्ञान कथा की प्रासंगिकता आदि इस थीम के विवेच्य होंगे।
३- विज्ञान कथा की नवीन प्रवृत्तिया¡ :
इसके अधीन विज्ञान कथा की कई नई प्रवृत्तियों- साइबर पंक, न्यूरोपंक, विज्ञान कथा-काव्य आदि का विवेचन एवं भाषा शैली गत विशेषताओं पर चर्चा होगी। साथ ही विज्ञान कथा सृजन पर संस्कृति के प्रभावों का भी विवेचन होगा। क्या विज्ञान कथा साहित्य सांस्कृतिक प्रभावों से मुक्त एक सार्वभौमिक साहित्य है या संस्कृति से प्रभावित विधा? इस थीम के अधीन इसका उत्तर जानने का प्रयास होगा।
४- विज्ञान कथाओं के जरिये विज्ञान संचार : : क्या यह विधा विज्ञान संचार/संवाद हेतु प्रभावी है? यह एक शैक्षणिक जुगत कैसे बन सकती है? संचार माध्यमों के लिए इसे कितने स्वरुपों में प्रस्तुत किया जा सकता है- नाटक, थियेटर, पोयट्री, झांकिया¡, उपन्यास, कार्टून , कामिक्स या फिल्म आदि? यही इस थीम का विवेच्य है।
५- विज्ञान कथा-भावी परिदृष्य :
क्या विज्ञान कथा को मुख्य धारा (मेन स्ट्रीम) के साहित्य के समकक्ष आना होगा? या इसे मुख्य धारा के साहित्य के संदूषण से बचाना श्रेयस्कर होगा जिससे इसकी विधागत परिशुद्धता बनी रहे। क्या विज्ञान कथा साहित्य का विकास प्रकारान्तर से विज्ञान और प्रौद्योगिकीय विकास को ही प्रभावित करता है़? इस थीम के यही विवेच्य विषय होंगे।
उक्त के अतिरिक्त एक समानान्तर विज्ञान कथा लेखन प्रशिक्षण सत्र नये रचनाकारों के लिए नियोजित है जिसमें वे अनुभवी विज्ञान कथा लेखकों के सीधे सामीप्य में इस विधा की बारीकियों को भली-भा¡ति समझ सकेंगे।

कार्यक्रम का स्वरुप :
प्रतिभागी थीमवार शोध पत्र/ सृजनात्मक आलेख तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत करेंगे एवं उसी पर आधारित विभाजित टोलियों में समूह चर्चा होगी।
शोधपत्र/सृजनात्मक आलेख अनुभव जन्य अध्ययनों, ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्यों, समीक्षा शोध-पत्रों तथा नवोन्मेषी विचारों से ओत-प्रोत होने चाहिए।
मानक शोध पत्रों का प्रकाशन/संकलन भी संकल्पित है।
पावर प्वाइण्ट प्रस्तुतिया¡ भी की जा सकेंगी।

माध्यम - हिन्दी और अंग्रेजी

कौन भाग ले सकते हैं?
जो विज्ञान कथा साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हों और उनका इस क्षेत्र में योगदान हो।
यात्रा फेलोशिप :
यद्यपि संसाधन बहुत सीमित हैं, तथापि विशेष प्रतिभा सम्पन्न प्रतिभागियों हेतु यात्रा फेलोशिप का भी सीमित प्रावधान है जिस हेतु पृथक से प्राप्त आवेदन पर विचार किया जा सकता है। ऐसे प्रतिभागियों को अनुमन्य/निर्धारित श्रेणी में यात्रा व्यय के साथ ही नि:शुल्क पंजीकरण, आवासीय तथा खान-पान की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी।
कृपया पंजीकरण पत्र को
डाक एवं ई-मेल द्वारा निम्न पते
पर भेजें।
(अन्तिम तिथि, 10 अक्टूबर, 2008)
- डॉ0 अरविन्द मिश्र
सेक्रेटेरियेट, (राष्ट्रीय परिचर्चा, 2008)
16, काटन मिल कालोनी, चौकाघाट
वाराणसी-221002 उ0प्र0
फोन :- ़ 91-9415300706, +91-542-2211363





- डॉ0 मनोज पटैरिया,
निदेशक (वैज्ञानिक, एफ)
राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद,
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार,
टेक्नोलाजी भवन, न्यू मेहरौली रोड,
नई दिल्ली-110016 (भारत)
फोन :- +91-11-26537976, 26590238,




7 comments:

अशोक पाण्डेय said...

आपलोग सराहनीय कार्य कर रहे हैं। वैज्ञानिक चेतना के प्रसार की यहां बहुत जरूरत है।

उन्मुक्त said...

अच्छी परिचर्चा है।

seema gupta said...

"great and appreciable efforts. Wish you good luck'

Regards

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

इसपर हिन्दी में पोस्ट देने के लिए शुक्रिया। मैं समझता हूं इससे ज्यादा लोगों तक बात पहुंचेगी।

रंजना [रंजू भाटिया] said...

अच्छी जानकारी ,अच्छा प्रयास ...

ताऊ रामपुरिया said...

आपको बहुत २ शुभकामनाएं !

राज भाटिय़ा said...

आप को बहुत बहुत शुभकामनाएं !
अओर आप का धन्यवाद हम सब के साथ यह सुचना बांटने के लिये