Saturday, 3 May 2008

फिर से जम गयी कटी हुयी उंगली !


जी हाँ ,फिर से जम गयी कटी हुयी उंगली !आप पूरा वीडियो यहाँ देख सकते हैं .यह समाचार बीबीसी हिन्दी पर भी देखा जा सकता है .एक दुर्घटना में उंगली कट जाने के बाद 'चमत्कारी पाउडर-पिक्सी पाउडर ' से इसे ठीक करने में अमरीका के एक शख्स को कामयाबी मिल गयी है।
इस समाचार को पढ़कर सहसा ही राक्षस राज रावण की याद हो आयी .उसके मिथकीय चरित्र मे यह ख़ास बात थी की उसका सिर कटाने के बाद फिर फिर उग आता था .यह शिव के कथित वरदान का फल था .यह सचमुच कितना रोचक है कि अब विज्ञान ऑर टेक्नोलॉजी ने अतीत के तंत्र मन्त्र ,शाप वरदान का जिम्मा अब अपने ऊपर ले लिया है .अब जैसा कि यही समाचार है बिना किसी दैवीय वरदान के यह चमत्कार हो गया है .

वैसे कुछ वैज्ञानिकों ने 'चमत्कारी पाउडर' के दावों को झुठलाते हुए कहा है कि 'उंगली उगने' की यह प्रक्रिया 'स्वाभाविक' या 'प्राकृतिक' चमत्कार हो सकती है.
दरअसल, वर्ष 2005 में एक दुर्घटना में अहियो प्रांत में सिनसिनाटी शहर के निवासी 69 वर्षीय ली स्पिवॉक की उंगली का एक हिस्सा कट गया था.बताया गया है कि उंगली के पहले मोड़ से ऊपर का हिस्सा कट गया था.एक मॉडल विमान के पंखों की चपेट में उनकी उंगली आ गई थी और उंगली का कटा हुआ हिस्सा भी नहीं मिल सका था.

स्पिवाक के भाई पीट्सबर्ग यूनीवर्सिटी में डॉ स्टीफ़न बेडीलेक के साथ दवा विभाग में काम करते थे. उन्होंने स्पिवाक को ये चमत्कारी पाउडर यानी एक्स्ट्रासेलुलर मैट्रिक्स दिया. जिसे स्पिवाक ने अपनी कटी उंगली पर छिड़का.इस पाउडर को सामान्य रुप से 'पिक्सी डस्ट' के नाम से जाना जाता है.यह सूअरों के एक्स्ट्रासेलुलर मैट्रिक्स कोशिकाओं से तैयार हुआ है.

स्पिवाक का कहना है कि कुछ ही हफ्तों में हड्डी, ऊतक, त्वचा और नाखून के साथ उंगली फिर से उग गई.

डॉ बेडीलेक की टीम पहले से ही एक्स्ट्रासेलुलर मैट्रिक्स की मदद से बहुत सरल जैविक संरचना तैयार करने पर काम कर रही थी.वैसे कुछ वैज्ञानिक अभी इस दावे को संदेह की निगाह से देख रहे हैं .
किंग्स कॉलेज लंदन में कोशिका अध्ययन विभाग में कार्यरत प्रोफ़ेसर स्टीफन मिंगर कहते हैं
, "मुझे नहीं पता कि वे एक्स्ट्रासेलुलर मैट्रिक्स को छिड़ककर उंगली कैसे उगा सकते हैं."

प्रो मिंगर कहते हैं, "अगर उंगली का कटा हिस्सा फिर से जोड़ भी दिया जाए तो तंत्रिका कोशिकाएँ फिर नहीं बन पातीं और व्यक्ति को उंगली के इस हिस्से पर दर्द या दबाव का अहसास नहीं होता."

वैज्ञानिकों को कहना है कि वे डॉ बेडीलेक की इस शोध रिपोर्ट का अध्ययन करना चाहेंगे.

मतलब साफ़ है कि भले ही वैज्ञानिक उंगली उगने की इस घटना को चमत्कार नहीं मान रहे हों, लेकिन इससे उन्हें शोध की दिशा तय करने में कुछ मदद तो ज़रूर मिलेगी।

कैसा अद्भुत है कि आधुनिक विज्ञान ने हमारे एक मशहूर मिथक को साकार कर दिखाया है .

3 comments:

Gyandutt Pandey said...

यह तो रिप्ले का "विचित्र किन्तु सत्य" जैसा लग रहा है!

Udan Tashtari said...

बहुत रोचक आलेख.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

Aap bgi gazab gazab ki cheejen khoj ke laate ho.