चंद्रयान का रूट चार्टभारत का चन्द्र विजय अभियान शुरू हो गया ..आज सुबह ही चंद्रयान -१ चन्द्रमा की दूरी नापने चल पडा है -उसे आंध्रप्रदेश के सतीश धवन अन्तरिक्ष केन्द्र श्रीहरिकोटा से छोडा जा चुका है और वह पल पल चाँद की दूरी को हमसे कम कर रहा है -भारत के लिए भी अब चाँद ज़रा पास खिसक आया है .मानव रहित चंद्रयान -१ दो वर्षों के चन्द्र विजय अभियान पर निकल पडा है .यह एक तरह का रोबोटिक अभियान है जो चन्द्र सतह का एक त्रिविमीय नक्शा तैयार करेगा और बेशकीमती खनिजों की उपस्थिति भी मार्क करेगा .
यह अभियान ख़ास तौर पर चन्द्र ध्रुवों की सतह और सतह के नीचे बर्फ की मौजूदगी की भी पड़ताल करेगा और भविष्य के नाभिकीय संलयन ऊर्जा स्रोत हीलियम -३ की भी प्रचुरता का पता लगायेगा जिसकी धरती पर बेहद कमी है .मगर यह नाभिकीय ऊर्जा का एक अपार स्रोत है .साथ ही टाईटेनियम जैसे दुर्लभ तत्व की खोजबीन भी की जानी है .यह मिशन चाँद के पास और दूर के हिस्सों की भी पड़ताल करेगा ।
चंद्रयान-१ जिस पोलर सैटलाईट लांच वेहकल पर आरूढ़ है वह उसे एक पृथ्वी परिक्रमा पथ पर जा छोडेगा .जहाँ से वह चाँद की टेढी राह पर निकल चलेगा -जैसे ही वह चाँद की गुरुत्व सीमा में आयेगा कई मोटरें दगेगीं जिससे उसकी गति धीमी पड़ जायेगी .अब यह चाँद की लगभग वृत्ताकार कक्षा में १००० किमी ऊपर होगा और ४-५ दिनों में चाँद के १०० कमी नजदीक तक पहुँच जायेगा .
इस यान के साथ ही कई देशों के प्रोब भी हैं जिसकी चर्चा साईब्लाग पर पहले हो चुकी है .अब भारत ,चीन ,जापान और दक्षिण कोरिया सतेलाईट छोड़ने के बड़े मुनाफे वाले व्यवसाय पर नजरें जमाये हैं और अपने अन्तरिक्ष कार्यक्रमों को एक अंतर्रास्त्रीय सम्मान और आर्थिक लाभ के नजरिये से भी देख रहे हैं .
चीनियों की अन्तरिक्ष की चहलकदमी से अभी पिछले ही माह वह विश्व का तीसरा देश हो गया जिसने ऐसी क्षमता हासिल की है .
अफ़सोस यह है कि भारत के चन्द्र विजय अभियान को इस देश में ही सराहना नही मिल रही है -लोगों का कहना है कि भारत जैसे गरीब देश में जहाँ अभी भी लोगों को जीने खाने की मूलभूत सुविधाएं तक मुहैया नही हुयी हैइन कार्यकर्मों में संसाधनों को पानी की तरह बहाया जाना बुद्धिमानी नही है -इस अभियान पर तकरीबन ४ अरब रुपये खर्च हो रहे हैं .


वरदंत की पंगति कुंद कली .........छवि मोतिन माल अमोलन की .कवि की इस अभिव्यक्ति को समझने लिए आपमें सौदर्य बोध के साथ ही प्रकृति -निरीक्षण का भी खासा अनुभव होना चाहिए ,अब अगरआपने कुंद पुष्प की कलियों को नहीं देखा है तो इसका अर्थ समझने से रहे .खैर मोतियों की माला तो बहुतों ने देखी है ,यहाँ उनसे दांतों की पंक्ति बद्ध शोभा की तुलना हुई है .सचमुच सुंदर पंक्तिबद्ध दांत मुंह की शोभा में चार चाँद लगाते हैं -कास्मेटिक सर्जरी के जरिये अब दांतों को और भी सुंदर और प्रेजेंटेबल बनया जा रहा है .सुंदर स्वच्छ दातों को उदघाटित करता मुक्त हास भला किसे अपनी ओर आकर्षित नहीं करता -नर नारी में यह बात समान है .दांतों में आभूषण जड्वाने के भी परम्परा विश्व की अनेक संस्कृतियों में रही है .भारत में लोगबाग दांतों पर सोने की परत चढ़वाते आए हैं .यह उनके सामाजिक स्तर और समृद्धि का परिचायक भी है -ऐसे शौकीन लोग प्रायः दिख जाते हैं । शायद कोई ब्लॉगर भाई भी स्वर्णमंडित दंत लिए हों ! महाभारत का वह मार्मिक प्रसंग तो याद है ना आपको जब दानी कर्ण ने अपने स्वर्णमंडित दांत ही सूर्य को अर्पित कर दिए थे ।




