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Monday, 6 October 2014

इबोला के बारे में वैज्ञानिकों ने यह बोला

लक्षण: यदि कोई वायरस के संपर्क में आ गया है तो लक्षण दो से 21 दिनों के बीच सकता है. जो है बुखार, मांसपेशियों में दर्द, सिर दर्द, गले में खराश, उल्टी और दस्त।

संक्रामकता : उपर्युक्त लक्षण जिस बोला ग्रसित मरीज में प्रगट होगा तभी वह संक्रामक होगा . यदि वायरस से संक्रमित व्यक्ति में उक्त लक्षण प्रगट नहीं है तो वायरस दूसरे व्यक्ति को संक्रमित नहीं कर सकता भले ही उसके रक्त में वायरस की मौजूदगी हो। एक ही हवाई जहाज या रेल बर्थ पर होने के बावजूद भी यदि लक्षण प्रगट नहीं है तो दूसरे सहयात्री संक्रमित नहीं हो सकते जिसका अर्थ है कि लक्षण प्रगट होने के पहले वायरस अन्य व्यक्ति को संक्रमित नहीं कर सकता.

संक्रामक क्षमता आर जीरो (R0) :यह वह फार्मूला है जिसका अर्थ है कि अमुक वायरल बीमारी की संक्रामकता क्षमता क्या है या उसके फैलने की तीव्रता क्या है जिसे आर शून्य कहा जाता है जिसका एक सूत्र है "संक्रामक रोगों के लिए अनुमानित प्रजनन संख्या.". इबोला का आर ओ 2 है मतलब इसके फैलने की तीव्रता कम है -और स्पष्ट कर दूँ यह बताता है कि किसी एक इबोला रोगग्रस्त से दो लोगों तक ही यह बीमारी पहुँच सकती है जबकि खसरा R0 18 है.

                         विभिन्न वायरल बीमारियों के फैलाव की क्षमता (आर जीरो )
                         आभार:SHOTS
संक्रमित की खोज : यह एक श्रमसाध्य कार्य है। इसके लिए स्वास्थ्य कर्मियों को इबोला रोगी के संपर्क में आये लोगों की खोजबीन की जाती है। इसके लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है जो यह जानकारी लिए दायित्व निभाता है कि इबोला ग्रस्त व्यक्ति कब किसके संपर्क में कहाँ आया और कहाँ कहाँ गया किसके साथ उठा बैठा पश्चिम अफ्रीका में, यह कार्य सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित स्थानीय स्वयंसेवकों द्वारा किया जा रहा है.

सीधा संपर्क: इसके अंतर्गत एक रोगी के परिवार के सदस्यों और दोस्तों के संपर्क की सबसे अधिक बारीकी से जाँच की जाती है . ऐसे लोग जो एक रोगी के शरीर के तरल पदार्थ (खून बलगम आदि) के सीधे संपर्क में आते हैं, और इसलिए सबसे अधिक संभावना उनमें वायरस के संक्रमण का होता है लक्षित समूह होते हैं ।

अप्रत्यक्ष संपर्क: इस समूह में उदाहरण के लिए, एक रोगी के साथ, एक कार्यस्थल या स्कूल में संपर्क किया गया हो सकता है ऐसे लोग शामिल हैं. ये रोगी के शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में न होने से कम खतरा उठाते हैं।

संगरोध: एक संक्रमित व्यक्ति के लिए एक कानूनी आदेश कि वह उपचार होने तक एक स्थान तक परिवार सहित सीमित हो जाय जरूरी है . रोगी के परिवार के सदस्यों को उनके घर के बाहर तैनात एक कानून प्रवर्तन अधिकारी के साथ, संगरोध में रखा जा सकता है।

Monday, 18 August 2014

इबोला ने धावा बोला!



इबोला यानि ई वी डी(Ebola virus disease)  -इबोला हीमोरजिक फीवर नर वानर समुदाय का रोग है जो इबोला विषाणु से होता है। विषाणु के संक्रमण के बाद दो दिन अथवा तीन सप्ताह के बाद भी लक्षण उभर सकते हैं। लक्षणों में इन्फ्लुएंजा जैसा बुखार, गले में खरास , मांसपेशियों में दर्द और सरदर्द हैं. कुछ भी निगलने में कठिनाई भी हो सकती है। तत्पश्चात वमन (उल्टी /कै) दस्त और शरीर पर चकत्ते होते हैं और लीवर और गुर्दे ठीक से काम नहीं करते। खून की उल्टियाँ भी होती हैं.  मरीज के शरीर के भीतर और बाहर भी रक्तस्राव शुरू हो जाता है। यह जानलेवा है।

इस विषाणु का संक्रमण पहले से ही संक्रमित मुख्यतः कपि वानरों या दूसरे जानवरों या मनुष्य के रक्त सम्पर्क या शारीरिक द्रव से संपर्क से हो सकता है। मनुष्य से मनुष्य में यह फ़ैल रहा है, अभी तक अफ्रीका में इसका ज्यादा कोप है मगर अब यह विश्वव्यापी बीमारी का स्वरुप लेता जा रहा है. कहा जा रहा है कि चमगादड़ों की एक प्रजाति (फ्रूट बैट ) बिना इससे प्रभावित हुए इसे फैला रही है। चूंकि मलेरिया, हैजा और अन्य विषाणु जनित रोगों के लक्षणों से इबोला के लक्षण मिलते जुलते हैं अतः इसके निर्णायक निदान /पहचान के लिए वाइरल प्रतिपिण्डों की जांच रक्त सैम्पल से की जाती है।

बचाव ही इसका कारगर उपाय है क्योकि अभी तक इसका प्रभावी टीका और शर्तिया इलाज सुलभ नहीं है.मांसभोजी मांस को छोटे वक्त हाथों पर दास्ताने पहने और अच्छी तरह उसे पकाएं। और किसी मरीज के आस पास या संपर्क में होने पर हाथों को साबुन से अच्छे ढंग से साफ़ करते रहे।अभी तक मृत्यु दर 50 से 90 के बीच देखी जा रही है। यह सबसे पहले सूडान और कांगो से पहचाना गया -और वर्ष 1976 से ही सहारा अफ्रीका के क्षेत्रों में देखा जाता रहा है। लगभग दो हजार लोग इसके चपेट में आ चुके हैं। इस समय यह महामारी का रूप ले चुका है और पश्चिमी अफ्रीका के गुएना, सिएरा लियोन और लाबेरिया तथा नाइजेरिया में कहर बरपा रहा है। एक हजार से अधिक लोग अब तक मर चुके हैं। वैक्सीन को विकसित करने के प्रयास युद्ध स्तर पर हैं मगर कोई कारगर सफलता नहीं मिल सकी है।

Monday, 23 August 2010

सुअरा की विदाई!

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि सुअरा ,अरे वही स्वाईंन  फ़्लू H1N1 के दिन लद गए ..अब यह विश्व व्यापी नहीं रहा .निदेशक मार्गरेट चैन का कहना है कि अब पूरी दुनिया ' पोस्ट पैन्ड़ेमिक पीरियड ' से गुजर रही  है ..अब यह यत्र तत्र मात्र सीजनल बीमारी होकर रह गयी है .मनुष्य की शारीरिक प्रतिरक्षा ने इसे धता बता दिया है .फिर भी  यह अभी खतरे के निशान ५ पर है ,जबकि यह सबसे खतरनाक स्तर पर जा पहुंचा था .अब इसकी हैसियत केवल सीजनल वाईरस की रह गयी है .मगर नेस्तनाबूद नहीं हुआ है यह .

तो क्या दुनिया भर में मची उहापोह और वैक्सीन तथा टामीफ्लू दवा के लिए मची हड़बोंग फिजूल ही थी ? विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारी ऐसा नहीं मानते -उनका कहना है की मानव स्वास्थ्य के लिए ज़रा भी चूक बड़ी भयावह हो सकती है .हम इन मामलों को ऐसे ही नहीं ले सकते .निदेशक चैन का कहना है कि हम भाग्यशाली रहे ..एच १ एन १ विषाणु बहुत आक्रामक नहीं हुआ ...यह अच्छा हुआ की यह विषाणु नए रूपों में उत्परिवर्तित नहीं हुआ और अपने एकमात्र इलाज टामी फ्लू /ओसेल्टामिविर के प्रति सहनशीलता नहीं विकसित कर पाया नहीं तो स्थिति निश्चित रूप से भयावह हो गयी होती .

अजब संयोग है की यह घोषणा विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तब हो रही है जब भारत में इस रोग के लक्षण कहीं कहीं देखे जा रहे हैं ...हमें याद रखना चाहिये की विदाई के बाद जैसे कुछ बिन बुलाये मेहमानों के फिर आ धमकने की असहज संभावनाएं बनी रहती हैं वैसे ही इन रोगाणुओं की भी वापसी संभव है ..इनकी और से हमें हमेशा सतर्क और  सजग रहना चाहिए ..

Monday, 31 August 2009

लो जी, एक और सुअरा !

अभी एक सुअरा (स्वायिन फ्लू ) के प्रकोप से मानवता कराह ही रही है कि एक नए सुअरा का पता लगने से वैज्ञानिक समुदाय चिंतित हो उठा है .गनीमत यही है कि यह नया सुअरा स्वायिन फ्लू के विपरीत मनुष्य के लिए अभी तक तो निरापद पाया गया है .मगर बकरे की माँ जो इस मामले में एबोला वाईरस हैं आख़िर कब तक खैर मनायेगी ?

वैज्ञानिकों ने एबोला वाईरस के इस स्ट्रेन- reston ebola virus की पहचान फिलीपीन के घरेलू सूअरों में की है ! वैसे यह सतरें तो अभी तक निरापद पाया गया है मगर है यह उसी घातक एबोला समूह का ही सदस्य जिनसे अनियंत्रित रक्तस्राव के साथ तेज बुखार हो जाता है !

खतरनाक एबोला विषाणु मनुष्य में छुआछूत से फैलने वाली बीमारियों में कुख्यात हैं और इनसे मरने की दर ८० फीसदी तक जा पहुँचती है ! अभी खोजा गया तो यह सुअरा सौभाग्य से एबोला परिवार का एकलौता निरापद सदस्य है -मगर विषाणु म्यूटेशन करते रहते हैं यह कौन नही जानता ? पहले पहल यह निरापद एबोला वाईरस १९८९ में बंदरों में पाया गया था -आख़िर ये वाईरस पहले पहल बंदरो (ऐड्स की याद है ? ) में ही क्यों मिलते है ? कौन बातएगा ? और फिर सुअरा बन मानवता को ग्रसित करते हैं ! कुदरत का यह क्या खेल है ??


इस निरापद सुअरा की खोज का श्रेय मैकिन्टोश नामक वैज्ञानिक को है और पूरी रिपोर्ट मशहूर साईंस पत्रिका के १० जुलाई के अंक में प्रकाशित है .
आभारोक्ति : स्वायिन फ्लू के लिए सुअरा शब्द की सूझ भाई गिरिजेश राव की है !

Sunday, 9 August 2009

स्वायिन फ्लू :समय गवाने का वक्त नही अब !

दुःख है कि इस विश्वव्यापी महामारी को लेकर की गयी आशंकाएं धीरे धीरे हकीकत में बदल रही है -और उन सभी लोगों के लिए जो ऐसी स्थितियों के प्रति एक बेपरवाह दृष्टि लिए रहते हैं अब सजग होने की जरूरत है - इन आकडों से ऐसे लोगों की आँख खुल जानी चहिये -

1. कुल पुष्टि हो चुके मामले-772

-मृत्यु -4

उम्र सीमा -

* 0-4 y.o. = 5%

* 5-14 y.o. = 33.97%

* 15-34 y.o. = 41.6%

* 35-59 y.o. = 18%

* 60+ y.o. = 1.5%


लिंग

* पुरूष : 49%

* औरत : 51%

ट्रेंड -बढाव पर

साफ़ है कि यह युवको को ज्यादा चपेट में ले रहा है -वे सावधान हो रहें . किसी संदेह के मामले में पूरी सावधानी बरते - मास्क का प्रयोग करें ! कई बार साबुन से मल मल कर हाथ धोएं !इस पृष्ठको देखें .


Tuesday, 2 June 2009

स्वायिन फ्लू -ताजातरीन !

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब इस विश्व महामारी ( पैन्डेमिक ) के स्तर को ६ पर ले जाने का फैसला कर लिया है .आपको याद दिला दें कि पैडेमिक -महामारियों के स्तर को एक ६ बिन्दु वाले स्केल से जाना समझा जाता है -६ का मतलब है कि अमुक वैश्विक महामारी दुनिया में चारो ओर फैल चुकी है ! स्वायिन फ्लू के यूरोप ,एशियाई देशों जिसमें भारत भी है ,दक्षिण अमेरिका ,आस्ट्रेलिया ,जापान आदि जगहों से फैलने के समाचारों की पुष्टि हो गयी है .
कुल मिला कर इसने ६४ देशों को अब अपने गिरफ्त में ले लिया है .अब तक ११७ मौतें जाहिर हो चुकी हैं .

विश्व स्वास्थ्य संगठन पर इस बात का दबाव पड़ रहा था कि इस महामारी के स्तर को ६ न घोषित किया जाय ! क्योकि इससे वैश्विक आवाजाही ,व्यवसाय और पर्यटन पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है -मगर अभी कल ही २३ देशों के ३० महामारी विशेषज्ञों कीसमवेत राय पर इसके छठें स्तर का अलर्ट किसी भी समय घोषित करने का फैसला ले लिया गया है.इसका आशय तो यही हुआ कि हमें इस त्रासदी के प्रति अपना शुतुरमुर्गी रवैया छोड़कर अब सतर्क हो जाना चाहिए !


स्वायिन फ्लू का वाहक वाईरस एच १ एन १ बहुत शातिर है और स्वस्थ युवाओं तक को भी अपने चपेट में ले रहा है जिनकी रोग प्रतिरोधन क्षमता काफी अच्छी मानी जाती है ! याद रखें इससे बचने का सबसे सरल तरीका है -अपने हाथ को कहीं भी बाहर से आने पर साबुन से साफ़ करें ! जिसे फ्लू हुआ दिखायी दे ,सामना होने पर मुंह नाक को रूमाल से ढकें ! विदेश से आने वाले मेहमानों पर चौकस नजर रखें ! उनके फ्लू ग्रस्त होने पर अपने करीब के स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचित करें -जैसे जिले के कलेक्टर या चीफ मेडिकल आफीसर (सी एम् ओ )को !


भारत में महामारी के तीन मामलों के पुष्टि हो चुकी है -पहला केस दुबई से होकर न्यूयार्क से हैदराबाद आये एक छात्र का है और नया मामला मां बेटे का है और यह भी बरास्ते दुबई न्यूयार्क से ही कोयम्बतूर पहुँचने का है सभी का इलाज भारत में उपलब्ध एकमात्र प्रभावी औषधि टामीफ्लू से किया जा रहा है .


Saturday, 2 May 2009

स्वाईन फ्लू की कुण्डली -कहीं ये दिन भी देखने न पड़ जायं (भविष्यवाणी ! )

क्या किसी ज्योतिषी ने स्वाईंन फ्लू के इस तरह विश्व-व्यापी बन जाने की भविष्यवाणी की थी ? यहीं चिढ होती है मुझे ज्योतिषियों से ! हे ब्लागरों ,ज़रा सावधान हो जाओ और ये भविष्यवाणी सुनों ! मगर ऐसा कोई दावा नही कि ये सोलहो आने सच होगीं -ये वैज्ञानिक भविष्यवाणी बोले तो फोरकास्टिंग है ! सच भी हो सकती है नही भी ! इसका मकसद बस आपको खबरदार रखना है ! और समय रहते आप अपनी कोई प्लानिंग कर सकें इसलिए ये भविष्यवाणी की जा रही है ! ब्लॉग दुनिया के सारे -गत्यात्मक अथवा गैर गत्यात्मक सभी ज्योतिषी भी पढ़ लें -मैं स्वाईंन फ्लू की कुण्डली बांचने जा रहा हूँ -

आज की ताजा हालात -
स्वाईंन फ्लू अब वैश्विक महामारी का रूप ले चुका है इसमें कोई शंका नही है ! विश्व स्वास्थ्य संगठन अब इसके चेतावनी के अन्तिम स्तर यानि ६ की भी घोषणा करने वाला ही है ! अब तक यह १६ देशों में फैल चुका है ! ३६५ मामलों की पुष्टि हो चुकी है -६०० से अधिक लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं .भारत में भी इसका खतरा मंडरा रहा है ! महाराष्ट्र के जलगांव में १०० सूअरों के मरने से शंकाओं का माहौल गरम हो उठा है ! अभी चूकिं भारत के अधिकांश भाग तेज गरमी की चपेट में हैं इस पर कुछ अंकुश लगा हुआ रहेगा ! यह वाईरस ज्यादा तापक्रम पर सक्रिय नही रहता .मगर बेहद सावधानी की जरूरत है .इस बार खतरा कितना बड़ा है यह इसी से जान सकते हैं कि बर्ड फ्लू का चेतावनी स्तर अभी भी ३ पर कायम है जबकि यह महामारी अब ५ के स्तर से ६ तक पहुँचने वाली है !

अब कल क्या होगा ? मतलब क्या क्या हो सकता है ?

* मई माह बीतते बीतते पूरी दुनिया स्वाईंन फ्लू के पहले दौर ( फर्स्ट वेब ) के चपेट में आ जायेगी !

* दुनिया भर में रोग निवारण ,क्वैरेनटाईन शिविरों की स्थापना होगी -अमेरिका में तो इनकी भरमार होगी !

*जगह जगह रोड ब्लाक्स ,मिलिटरी पोस्ट और निगरानी ,मास्क और दास्ताने पहने लोग दिखेंगें ,जगह जगह स्वास्थ्य कर्मी लोगों की जांच , तापक्रम लेते दिखेंगें !

* देशी और अंतरास्ट्रीय हवाई यात्राये ,जमीनी परिवहन यकायक ठप पड़ सकते हैं !

*दैनिक उपभोग और खान पान के बिक्री स्टोर बंद हो जायेंगें -पेट्रोल पम्पों ,सरकारी दफ्तरों ,बैंको पर ताले लटकते नजर आयेंगें ! किसी प्रमुख अवकाश सा नजारा दिखेगा ! सड़कों पर कम कारें -टैफिक -बस मिलिटरी या पुलिस का भारी बंदोबस्त दिखेगा !

* फिर आएगा दूसरा दौर ( माईल्ड वेब ) -उपरोक्त स्थितियां और भी गंभीर हो उठेंगीं !

* वर्ष के अंत तक मारक लहर ( डेडली वेब ) भी आ जायेगी ! पूरी दुनिया में लोग मास्क पहने हुए होगें ! बाजार ,व्यावसायिक प्रतिष्ठान ,माल ,स्कूल कालेज अनिश्चित काल के लिए बंद हो जायेगें !

* लोगों को ज्यादातर घर के भीतर रहने को बाध्य होना होगा !

* समूचे विश्व की अर्थव्यवस्था चरमरा उठेगी -मंदी का एक नया दौर शुरू होगा !

* लोगों के दैनिक क्रिया कलाप ,रोजगार बुरी तरह प्रभावित होगें -केवल बहुत जरूरी खरीद फ़रोख्त -औषधियों ,अत्यावश्यक वस्तुओं की ही होगी -घर से प्रायः निकलने की मनाही होगी !

* दो प्रतिशत मृत्यु दर की सम्भावना होगी !

ये स्थितियां आ सकती हैं और नही भी -यह आपको डराने के लिए नही बल्कि आगाह करने के लिए है ! ज्ञात रहे १९१८ में इसी विषाणु H1N1 के चलते पूरी दुनिया में ४-५ करोड़ लोग मौत के मुंह में समां गए थे ! आज ऐसे विषाणु आक्रमणों से निपटने की हमारे पास बढियां रणनीति और संसाधन हैं फिर भी हमें किसी भी स्तर पर भी लापरवाही नही दिखानी है ! विज्ञान संचारक ब्लागरों ने स्वाईंन फ्लू की ताजातरीन खबरे आप तक पहुचाने की एक कार्यनीति तैयार कर ली है ! आप यहाँ की एक खिड़की में रोज ताक झांक कर सकते हैं !

सन्दर्भ :

http://forecastfortomorrow.com/Files/swineflu.pdf

Sunday, 26 April 2009

सावधान ! विश्वव्यापी बन सकता है अमरीका में फैला यह स्वायिन -फ्लू !


बुरी खबर है ! अमेरिका में सूअरों से उपजी एक फ्लू की महामारी तेजी से फैल रही है और आशंका व्यक्त की जा रही है कि कहीं यह पूरी दुनिया में महामारी ( Pandemic) बन कर फैल न जाय ! मेक्सिको में८० लोग मर चुके हैं . १३०० को जांच के दायरे में रखा गया है ! व्हाईट हाउस तक सकते में आ गया है ! अभी सुरक्षा तंत्र को ३ के स्तर पर मुस्तैद किया गया है -४ पर होते ही विश्वव्यापी खतरे की घंटी बज जायेगी !

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार फ्लू की यह नयी महामारी का प्रकोप मेक्सिको के १८ लोगों और यूं एस ये के २० लोगों में पक्के तौर पर देखी जा चुकी है -न्यू यार्क ,ओहियो ,कंसास ,टेक्सास और कैलिफोर्नियाँ में इस महामारी के फैलने की खबरे मिल रही हैं ! न्यूजीलैंड और स्पेन से भी ऐसे ही खबरें आ रही हैं ! अभी इसके बढ़ने के आसार हैं ! इस पर पारम्परिक फ्लू औषधियां भी काम नहीं कर रही हैं -हाँ नयी औषधियां टामिफलू और रेलेंजा थोड़ा कारगर हैं जिनकी पाँच करोड़ खुराकें आनन् फानन में जारी कर दी गयी हैं !

मेक्सिको में स्कूल कालेज बंद कर दिए गए हैं .लोगों को घूमने घामने के बजाय घर में ही कैद रहने की हिदायत दी जा रही है -कहा गया है लोग हाथों को साबुन से साफ़ करते रहें ! चीन में भी अलर्ट कर दिया गया है ! जिस वाईरस स्ट्रेन पर शंका है -H1N1 वह पक्षी ,मनुष्य और सूअरों के सम्मिलित जेनेटिक अवयवों को धारण किए हुए है और बहुत ही खतरनाक है !

भारत भी इस बीमारी के आसान टारगेट में हो सकता है क्योंकि यहाँ रोजाना हजारों लोग प्रभावित देशों ,मुख्यतः अमेरिका से आ रहे हैं ! बहुत सम्भव है आपके परिजन ही अवकाश बिताने अपने जन्म स्थान को लौट रहे हों ! उचित होता कि भारत सरकार मौके की नजाकत को समझते हुए तत्काल हाई अलर्ट घोषित करते हुए रोग निरोधन ( क्वैरेनटाय़ीन ) की व्यवस्था अमल में लाये ! हवाई अड्डे से उतरते ही यात्रियों को पृथक कक्षों ( आयिसोलेसन वार्ड्स ) में रोग निरोधन से आश्वस्त होने के बाद ही उन्हें खुले भ्रमण पर जाने दे !


हम कोई भी खतरा नही उठा सकते -हमारे पास टामीफ्लू औषधि का भी कोई बड़ा जखीरा नही है ! यह महामारी यहाँ फैलने न पाए इस लिए सारे एहतियातन कदम उठाये जाने चाहिए ! बिना देरी के फौरन ?! है कोई सुनने वाला ?