सौजन्य :मीडिया मग्नेट Science could just be a fun and discourse of a very high intellectual order.Besides, it could be a savior of humanity as well by eradicating a lot of superstitious and superfluous things from our society which are hampering our march towards peace and prosperity. Let us join hands to move towards establishing a scientific culture........a brave new world.....!
Tuesday, 8 July 2008
इस जुल्फ के क्या कहने .........!
सौजन्य :मीडिया मग्नेट Monday, 7 July 2008
व्यवहार विज्ञानी निरख रहे हैं नारी का सौन्दर्य !
नारी सौन्दर्य-नख से शिख तक एक मनोरम यात्रा
Sunday, 6 July 2008
"इस साँप का काटा सुबह की रोशनी नही देखता "
करैत जो नाग से भी ज्यादा विषैला है !"इस साँप का काटा सुबह की रोशनी नही देखता " जैसी धारणा संभवतः करैत साप को लेकर ही है .यह एक सुस्त साँप है जो गाँव के कच्चे मकानों में े प्रायः घर के अन्दर बिलों में अपना डेरा जमाता है .
मैं समझता हूँ कि यही वह सांप है जिसके डसने से आदमी का बचना मुश्किल है ,हाँ समय से एंटीवेनम मिल जाय तो जान बच सकती है .यह रात को ही असावधान रहने पर या चारपाई पर पहले से ही मौजूद रहने पर सोते में काट सकता है .मुश्किल यह है कि इसके काटने पर कोई ज्यादा या कभी कभी तो बिल्कुल सूजन ही नही होती .और विषदंत भी कोबरा की तुलना में महीन होते हैं ,जिससे ये भी प्रमुखता से नही दिखते.अब यह पहचान मुश्किल हो जाती है कि किसी विषैले साँप ने काटा भी है या नही .
हाथ ,पैर का बेजान पडना एक लक्षण है जो थोडा विलंब से शुरू होता है लेकिन जल्दी ही गंभीर रूप ले लेता है .नतीजतन जिसे यह रात में काट ले और एंटीवेनम न मिले तो समझिये काम तमाम !
इसका मात्र ६ माईक्रोग्राम ही किसी की जान लेने में पर्याप्त है .
इस साँप से सबसे अधिक सावधान रहने की जरूरत है .ऊपर के चित्र में इसे पहचान लें यह काले रंग का नीली आभा लिए होता है और शरीर पर सफ़ेद धारियाँ दिखती हैं -कभी कभी वोल्फ स्नेक[संखारा या कौडिसाप] जो विषैला नही होता है को लोग भ्रम से करैत मान लेते हैं -दरअसल वोल्फ स्नेक भूरापन लिए होता है और पालतू बन जाता है .
एंटीवेनम को रखने के लिए किसी लाईसेंस की जरूरत नही है .बड़े मेडिकल स्टोरों पर यह मिल जायेगा .यह पाउडर फार्म में होता है और डिस्टिल्ड वाटर के साथ मिला कर घोल बना कर इंजेक्ट होता है .इसे यहाँ से भी प्राप्त किया जा सकता है -
Serum Institute of
Poona-४११००१
हिमाचल प्रदेश में भी सोलन जिले के कसौली नामक स्थान पर सर्पविष शोध और निर्माण संस्थान है .
मेरी कामना है कि किसी की भी सर्प दंश से मौत न हो ....आप भी कृपा कर सापों के बारे में लोगो में जागरूकता लायें .......
अब इस दहशत भरे माहौल से आपको बाहर लायें .....ईथोलोजी पर एक सौन्दर्यपरक श्रृखला की प्रतीक्षा करें -
नारी -नख शिख सौन्दर्य -नारी सौन्दर्य -व्यवहार विदों की नजर में ।
प्रतीक्षा करें ...........
Saturday, 5 July 2008
सर्पदंश: बचाव और उपचार
सर्पदंश: बचाव और उपचार
यदि आप गावों में रहते हैं तो टॉर्च या पर्याप्त रोशनी के साथ ही बाहर जाएँ ,बरसात में ख़ास तौर पर .पैरों को गम बूट ज्यादा सुरक्षा देते हैं मगर नही है तो ऐसा जूता रहे जो पैर को ऊपर तक अच्छी तरह ढक सके .साथ में एक डंडा और गमछा भी रखें .
यह सापों का प्रणय - प्रजनन काल भी है -ख़ास तौर पर नाग -कोबरा का .यह एक आक्रामक साँप है .यह अपनी टेरिटरी बना कर रहता है यानी एक ऐसा क्षेत्र जिसमें किसी को भी आने पर इसे नागवार लगता है .यदि प्रणय काल में कोई इस क्षेत्र से गुजरता है तो यह आक्रमण कर सकता है .इस पर पैर पड़ जाय तो यह काट ही लेगा .अगर किसी की अचानक नाग से भेट हो जाय तो वह अपना गमछा या कोई भी कपडा तुरत फुरत निकाली हुयी शर्ट या गंजी उस पर फेक दें.यह आदतन उससे उलझ लेगा और वह रफू चक्कर हो सकता है .कोबरा को लाठी से मारना ज़रा अभ्यास का काम है .लाठी तभी इस्तेमाल में लायें जब मरता क्या न करता की पोजीशन हो जाय .क्योंकि ऐसा देखा गया है कि निशाना यदि उसके मर्म स्थल [फन और इर्दगिर्द का हिस्सा ]पर नही पडा और आदतन लाठी मारने वाले ने लाठी उठायी तो वह उसके शरीर पर आ गिरेगा .और फिर वह क्रोध में काटेगा और विष भी ज्यादा निकालेगा .
विषैले सापों में दो विषदंत आगे ही ऊपर के जबड़े में होता है और २ विष की थैली इसी से दोनों और जुडी रहती हैं
खुदा न खास्ता साँप काट ही ले तो -
धैर्य रखें ,दौड़ कर न जाएँ -भागें न ,इससे विष रक्त परिवहन के साथ जल्दी ही पूरे शरीर में फैल जायेगा .रूमाल ,गमछा से जहाँ दंश का निशान है उसके ऊपर के एक हड्डी वाले भाग यानी पैर में काटा है तो जांघ में और हाथ में काटा है तो कुहनी के ऊपर बाँध दे ,बहुत कसा हुआ नही .पुकार कर किसी को बुलाएं या धीरे धीरे मदद के लिए आस पास पहुंचे .और तुंरत एंटीवेनम सूई के लिए पी एच सी पर या जिला अस्पताल पर पहुंचे .यह सूई अगर आसपास किसी बाजार हाट के मेडिकल स्टोर पर मिल जाय तो इंट्रामस्कुलर भी देकर अस्पताल तक पहुंचा जा सकता है -जहाँ आवश्यकता जैसी होगी चिकित्सक फिर इंट्रा वेनस दे सकता है . अगर आप के क्षेत्र में साँप काटने की घटनाएँ अक्सर होती है तो पी एच सी के चिकित्सक से तत्काल मिल कर एंटी वेनम की एडवांस व्यवस्था सुनिशचित करें - मेडिकल दूकानों पर भी इसे पहले से रखवाया जा सकता है . अगर शरीर में जहर ज्यादा उतर गया है तो एंटीवेनम के ५-१० वायल तक लग सकते हैं . एंटीवेनम १० हज़ार लोगों में एकाध को रिएक्शन करता है -कुशल चिकित्सक एंटीवेनम के साथ डेकाड्रान/कोरामिन की भी सूई साथ साथ देता है -बल्कि ऐसा अनिवार्य रूप से करना भी चाहिए .
कोबरा के काट लेने के लक्षण क्या हैं -काटा हुआ स्थान पन्द्रह मिनट में सूजने लगता है .यह कोबरा के काटे जाने का सबसे प्रमुख पहचान है .ध्यान से देखें तो दो मोटी सूई के धसने से बने निशान -विषदंत के निशान दिखेंगे .
प्राथमिक उपचार में नयी ब्लेड से धन के निशान का चीरा सूई के धसने वाले दोनों निशान पर लगा कर दबा दबा कर खून निकालें .और किसी के मुहँ में यदि छाला घाव आदि न हो तो वह खून चूस कर भी उगल सकता है .
विष का असर केवल खून में जाने पर ही होता है यदि किसी के मुंह में छाला पेट में अल्सर आदि न हो तो वह सर्पविष बिना नुकसान के पचा भी सकता है .
कोबरा का १२ माईक्रो ग्राम आदमी को मार सकता है मगर वह एक भरपूर दंश में ३२० माईक्रोग्राम विष तक मनुष्य के शरीर में उतार सकता है .मगर प्रायः लोग पावों को तेज झटक देते हैं तो पूरा विष शरीर में नही आ पाता .इसलिए कोबरा का काटा आदमी ५-६ घंटे तक अमूमन नही मरता .और यह समय पर्याप्त है एंटी वेनम तक पहुँच जाने के लिए।
करैत सुस्त साँप है मगर इसका ६ मिक्रोग्राम ही मौत की नीद सुला सकता है .यानी कोबरा के जहर की केवल आधी ही मात्रा .इसके बारे में कल ......
Thursday, 3 July 2008
सापों से बढ़ती मौतें और अनोनीमस जी की टिप्पडी !
मैं यहाँ विज्ञान का उपदेश देने नही आया .मनुष्य की सोशल ड्यूटी होती है वही निभा रहा हूँ .विभिन्न संचार माध्यमों के जरिये विगत तीस वर्षों से मैं लगातार यह कोशिश करता रहा हूँ कि सर्प दंश के रोगियों की संख्या कम हो सके .इसका श्रेय नही लेना चाहता पर समय से हस्तक्षेप के चलते मुझे अपने सामने कुछ लोगों को मौत के मुंह से वापस आ जाने का अनिवर्चनीय सुख साझा करने का अवसर मिला है -जो मेरे जीवन को सार्थकता प्रदान करता है .
मेरे टिटहरी सरीखे प्रयास से और आप लोगों तक यह बात पहुंचा कर ,इस गुजारिश के साथ कि इस बात को आप और लोगों में बाटें ताकि राजा परीक्षित के समय से छाया सर्प अज्ञानता का तमस धीरे धीरे दूर हो सके .
राजा परीक्षित को भी गुमान था कि उन्हें तक्षक नही डस सकेगा -सारी प्राच्य विद्याएँ उनकी जान नहीं बचा सकीं .इस आख्यान के यथार्थ /निहितार्थ को समझना चाहिए .
एनानिमस जी ,विज्ञान में मुल्ले -मठाधीशों के लिए कोई जगह नही होती और न ही यहाँ फतवों के जारी होने का कोई रिवाज ही है .मैं तो सापों के बारे में ये जानकारियाँ महज आप सभी से इसलिए बाँट रहा हूँ ताकि लोगों अकाल मौतों से बचाया जा सके .
अब कुछ काम की बात हो जाय .यह देखा गया है कि कई उन लोगों को जिन्हें धामन [रैट स्नेक ],पंडोल या देढ़हा [वाटर स्नेक ],या वोल्फ स्नेक आदि विषहीन सौंप काट लेते हैं उन पर झाड़ -फूँक का चमत्कारिक -मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है ।और इसका सेहरा ओझाओं सोखाओं के सर दिया बाँध जाता है .
ओझा सोखा तरह तरह के झाम फैलाते हैं -कान में जडी डालते हैं ,जिससे कान के परदे भी फट जाते हैं -नीम की पत्ती खिलायी जाती है जो घबराहट में मीठी लगती है .मनोन्माद में या दर्द से रोगी चिल्लाता है तो उसे साँप का लहर आना बताया जाता है .वह अनाप शनाप बोलता है तो बताया जाता है कि साँप स्वयं बोल रहा है ।इसे स्थानीय भाषा में 'अभुआना 'कहते हैं .आदि आदि .
अब चूंकि रोगी को तो विषैले सौंप ने तो काटा नही है वह इस तरह के आलतू फालतू उपचार के बाद ठीक भी हो जाता है -पी जे देवरस ने इन झाड़ फूंकों का विस्तृत व्योरा अपनी किताब 'द स्नेक आफ इंडिया ' में दिया है .नेशनल बुक ट्रस्ट आफ इंडिया से हिन्दी और अंगरेजी में प्रकाशित इस पुस्तक को पुराने और नयी पीढी को पढने की ,ख़ासकर जिनका संपर्क अभी गावों से बना हुआ है मैं जोरदार सिफारिश करता हूँ .यह साँपों का वेद है .
विषैले सौंप के मामले में झाड़ फूँक की सारी तदबीरें फेल हो जाती हैं और मरीज तिल तिल कर मौत की और बढ़ता रहता है .जिसका जिक्र कल .......
Wednesday, 2 July 2008
शुरू हो गया सर्पदंश से मौतों का सिलसिला ....
यह हैं सापों के लम्बरदार और सबसे अधिक मानव मौतों के जिम्मेदार नाग महराजTuesday, 1 July 2008
डिजिटल दुनिया के बाहर भी साईब्लाग की धमक !
यह मेरे लिए एक प्रोत्साहन भर है .एक उत्प्रेरण सरीखा बस .न तो मैं यहाँ फूल कर कुप्पा हो गया हूँ और न तो यह डींग मार रहा हूँ कि लो बच्चू मैंने यह कर के दिखा दिया .यह तो विज्ञान के जन संचार के लिए उठा मेरा एक अदना सा कदम है ।हाँ ,ऐसे प्रोत्साहन किसी को भी अपने काम में लगे रहने की प्रेरणा देते हैं .
बहुत बहुत आभार, हिन्दुस्तान, एक सात्विक मुहिम में मुझे 'कन्नी' भर का बल देने के लिए .....उत्साह बढ़ाने के लिए ....और आभार मेरे मित्रों और सुधी पाठकों का कि मेरे इस अकिंचन प्रयास को उन्होंने सर माथे पर रख रखा है .हाँ ,इसने मेरे उत्तरदायित्व और कार्य के प्रति समर्पण को और बढ़ा दिया है -देखता हूँ समय के पृष्ठ पर साईब्लाग कितनी जगह घेर पाता है .